जिला कृषि, विकास, औद्योगिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी में मंचीय कार्यक्रमों की श्रृंख्ला में सोमवार को शाम-ए-गजल का आयोजन हुआ। फनकार नियाजी ने मंच पर पहुंचे ही मुरादाबाद के मशहूर शायर मंसूर उस्मानी का शेर सुनाया। उन्होंने कहा कि इश्क उनको अता नहीं होता। जिन के दिल में खुदा नहीं होता। जिगर की गजल से कार्यक्रम की शुरुआत होने के बाद गजलों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति हुई। चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है। हमको अब तक आशिकी का वो जमाना याद है। यो तो किया कि सब पे भरोसा नहीं किया। लेकिन किसी के साथ में धोखा नहीं किया। हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह आदि गजलों को भी खूब पसंद किया गया। नियाजी ने 10 से ज्यादा गजलें, एक भजन व अल्लाह ही अल्लाह मनकबद प्रस्तुत की। प्यार नहीं है जिसके दिल में वो मूरत इंसान नहीं है। भगवान मेरे घर आए थे या मैंने सपना देखा था। इन संगीतबद्ध प्रस्तुतियों को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में जिला पूर्ति अधिकारी अजय प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी अधिकारी ऋतुषा तिवारी, कार्यक्रम के संयोजक परवेज नाजिम, प्रदर्शनी प्रभारी राहुल शर्मा, अतुल जौहरी, राधेश्याम शर्मा, सुशील शर्मा, डॉ. प्रदीप शर्मा, आबिद हुसैन, संजीव आकांक्षी, क्रिस्टोफर माइकल आदि मौजूद रहे।
दूरदर्शन कलाकार अरुण मोहन ने भी सुनाईं गजलें
दूरदर्शन के कलाकार अरुण मोहन शंखधर ने उसामा शुजात नियाजी के मंच संभालने से पहले गजलें सुनाईं। उनकी आवाज पर गजलों को श्रोताओं ने खूब सराहा। शंखधर ने सुनाया कि दिल की बात लबों पर लाकर अब तक हम दुख सहते हैं। हमने सुना था इस नगरी में दिल वाले भी रहते हैं। तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है। तेरे आगे चांद पुराना लगता है।