नगर निगम के कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में करीब पांच साल पहले तक कूड़ा निस्तारण होता था। एटूजेड कंपनी ने प्लांट लगाया गया। प्लांट में कूड़े से खाद बनाई जाती थी। लेकिन कंपनी से अनुबंध टूट जाने के बाद से डंपिंग ग्राउंड में कूड़े का पहाड़ बन गया है। यहां से उठती बदबू से आसपास के लोग बीमार पड़ रहे हैं।
निगम का डंपिंग ग्राउंड रामपुर रोड पर गुलाबाड़ी के पास रामगंगा पुल से थोड़ा आगे है। शहर का पूरा कूड़ा यहीं डाला जाता है। पिछले पांच सालों से यहां कूड़ा तो डाला जा रहा है लेकिन उसका निस्तारण नहीं हो रहा है। इस कारण यहां आसपास के लोगों में बीमारी फैलने लगी है।
यहां भैंसिया, गुलाब बाड़ी समेत आसपास के लोग गंदगी से होने वाली बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। पिछले साल भैंसिया गांव में दर्जनों लोग मलेरिया की चपेट में आ गए थे। डंपिंग ग्राउंड तक कूड़ा पहुंचाने वाली गाड़ियों के कई चालक डंपिंग ग्राउंड से पहले ही कूड़ा डाल जाते हैं। लोग उस कूड़े में आग लगा देते हैं।
वहीं यह डंपिंग ग्राउंड नदी के पास है। ऐसे में अगर यहां कूड़ा डलता रहा तो कूड़ा नदी में जाएगा। इससे नदी भी दूषित होगी। डंपिंग ग्राउंड में रोजाना साढ़े तीन से 4 सौ मीट्रिक टन कूड़ा डंप किया जाता है। ऐसे में यहां कूड़े का पहाड़ बनता जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन नहीं हो रहा नगर निगम नगरीय ठोस अवशिष्ट नियमावली 2016 का पालन नहीं कर रहा है। जिसके अंतर्गत कूड़े का निस्तारण करना अनिवार्य है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निगम को कई बार नोटिस जारी किया है।
जर्जर हो गया प्लांट, जंक खा रही गाड़ियांप्लांट में लगी मशीनें देखरेख के अभाव में जर्जर हो गई हैं। मशीनों में जंग लग गया है। अब इस प्लान का उपयोेग करना भी चाहें तो पहले मरम्मत करानी पड़ेगी। यहां नगर निगम की कई उपयोगी वाहन जंग खा रहे हैं।
यहां जेसीबी, टाटा एस, टिपर, रिक्शा समेत दर्जनों वाहन सालों से खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं। लेकिन उनका उपयोग करने के लिए निगम ने कोई पहल नहीं की।
डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के निस्तारण के लिए एक कंपनी से वार्ता चल रही है। पहले यहां प्लांट में कूड़े से खाद बनाई जाती थी। लेकिन अब कोशिश की जा रही है कि यहां कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगे। इसके लिए प्रक्रिया जारी है।
- आशीष शुक्ला, वरिष्ठ प्रभारी अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन