एंबुलेेंस चालक नीरज कुमार और ईएमटी अमित सक्सेना
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मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा से गर्भवती महिला को जिला महिला अस्पताल लाने वाली एंबुलेंस का चालक और ईएमटी महिला के परिवार के लिए देवदूत बन गए। अस्पताल पहुंचने से 15 किमी पहले महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। एंबुलेंस में महिला के साथ परिवार से सिर्फ उसका पति था।
परिवार से कोई महिला सदस्य और आशा वर्कर नहीं होने से उसका प्रसव कराना मुश्किल था, लेकिन महिला की जान बचाने के लिए पति की अनुमति पर एंबुलेंस के चालक और ईएमटी ने सुरक्षित प्रसव करा दिया। महिला और बच्चा सुरक्षित हैं और दोनों महिला अस्पताल में भर्ती हैं।
ठाकुरद्वारा में रहने वाले मजदूर की पत्नी को मंगलवार रात डिलीवरी के लिए ठाकुरद्वारा सीएचसी ले जाया गया। महिला का हेमोग्लोबीन काफी कम था। प्रसव कराने में जोखिम था। सीएचसी से महिला को मुरादाबाद महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। महिला की हालत खराब थी। लिहाजा, रात में आशा वर्कर का इंतजार करने से पहले एंबुलेंस गर्भवती को मुरादाबाद के लिए लेकर आ गई। एंबुलेंस में महिला का पति था। परिवार की कोई महिला सदस्य नहीं थी।
इस्लाम नगर के पास पहुंचने तक महिला दर्द से कराहने लगी। अत्यधिक प्रसव पीड़ा होने पर उसकी जान पर भी खतरा बन गया। एंबुलेंस को तेज भगाकर भी अस्पताल नहीं ला सकते थे। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस के चालक नीरज कुमार और ईएमटी अमित सक्सेना ने महिला के प्रति से प्रसव कराने की अनुमति मांगी।
प्रसव नहीं कराने पर उसकी जान और बच्चे को खतरा बताया। पति की अनुमति मिलते ही चालक और ईएमटी ने धारक नगला स्थित कॉसमॉस अस्पताल के पास एंबुलेंस में रात साढ़े बारह बजे महिला का सुरक्षित प्रसव करा दिया।
एंबुलेंस सेवा संघ के मीडिया प्रभारी जितेंद्र सिसोदिया ने बताया कि महिला और उसका नवजात शिशु सुरक्षित हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। जितेंद्र सिसोदिया ने बताया कि दोनों एंबुलेंस चालकों को पुरस्कृत किया जाएगा।