कोरोना संक्रमण काल में एक तरफ डॉक्टरों की छुट्टियों पर रोक है, वहीं दूसरी तरफ मुरादाबाद की नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के पति डॉ. ब्रजेश जिला अस्पताल से 85 दिन से गैरहाजिर हैं। उनकी गैरहाजिरी का दौर 16 अप्रैल से शुरू हुआ था। यह वो अवधि है, जबकि कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप चरम पर था और छुट्टियों पर रोक के बीच डॉक्टरों को ड्यूटी की निर्धारित अवधि से ज्यादा वक्त तक काम करना पड़ रहा था लेकिन यह नियम डॉ. ब्रजेश पर लागू नहीं था। उनका दावा है कि वह लीव विदआउट पे (एलडब्ल्यूपी) पर हैं, जबकि विभागीय अफसर बताते हैं कि लीव विद आउट पे के लिए कारण बताते हुए स्थानीय स्तर पर आवेदन करना होता है। इसकी मंजूरी शासन स्तर से होती है लेकिन डॉ. ब्रजेश के स्तर से एलडब्ल्यूपी के लिए स्थानीय स्तर पर आवेदन नहीं किया गया है।
नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के पति डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह जिला अस्पताल में एनस्थेटिस्ट के पद पर तैनात हैं। वह ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) का भी काम संभालते रहे हैं। फिलहाल 16 अप्रैल से वह ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं। हाजिरी रजिस्टर पर उनके नाम के आगे अनुपस्थित अंकित किया जा रहा है। 85 दिनों से गैरहाजिर डॉ. ब्रजेश सिंह ने 19 जुलाई तक ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। ये हाल तब है, जब अप्रैल से मई के बीच कोरोना की दूसरी लहर के घातक स्वरूप ले लेने के कारण शासन ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टी पर रोक लगा दी थी। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सिर्फ इमरजेंसी में अवकाश देने की अनुमति थी। बावजूद इसके डॉ. ब्रजेश सिंह ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए।
स्वास्थ्य महकमे और भाजपा से जुड़े लोग दबी जुबान में स्वीकारते हैं कि ड्यूटी से गैरहाजिर रहते हुए डॉ. ब्रजेश की मध्य अप्रैल से शुरू हुई पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में व्यस्तता थी। पत्नी को जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित कराने से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने तक की प्रक्रिया में उनकी बड़ी हिस्सेदारी रही। टिकट तय होने से लेकर डॉ. शैफाली के जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभालने तक की अवधि में वह भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात में आगे रहे। यह बात अलग है कि वह खुद के गले में दिक्कत को गैर हाजिरी की वजह बताकर लीव विदआउट पे पर होने की बात कह रहे हैं लेकिन वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि लीव विदआउट पे इकतरफा फैसला नहीं है। इसके लिए तैनाती स्थल पर कारण बताते हुए आवेदन किया जाता है, जिस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होता है।
- मैंने सात जून को प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का कार्यभार संभाला था। डॉ. ब्रजेश इससे पहले से गैरहाजिर चल रहे हैं। उनकी ओर से छुट्टी के संबंध में मुझे कोई लिखित सूचना नहीं दी गई है। डॉ. कल्पना सिंह (पूर्व प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक) को कोई लिखित सूचना दी हो तो मुझे नहीं पता। फिलहाल जून माह में उनकी सैलरी नहीं जारी हुई है। उनके आने पर उनकी अनुपस्थिति के बारे में जवाब मांगा जाएगा। कारण स्पष्ट करने के बाद नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।
- डॉ. शिव सिंह, कार्यवाहक प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
- मैं लीव विथ आउट पे पर हूं। मैंने तीन महीने से सैलरी नहीं ली है। इस संबंध में मैंने अधिकारियों को अवगत करा दिया है। मुझे कोई सैलरी नहीं दी जाए। लीव विदआउट पे मेरा अधिकार है। मैंने मेडिकल, ईएल या सीएल नहीं ली है। मैंने अप्रैल में 15 दिन काम किया था, लेकिन उसकी सैलरी भी मुझे अभी नहीं मिली है। मेरे गले में दिक्कत हो गई है। एक ऑपरेशन करा चुका हूं, दूसरा ऑपरेशन कराने के बाद ड्यूटी ज्वाइन करूंगा।
- डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, जिला अस्पताल
अप्रैल-मई में लगी थीं नौ इमरजेंसी ड्यूटी लेकिन एक भी नहीं की
डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह की 16 अप्रैल से 31 मई तक सीएमएस ने ईएमओ के तौर नौ इमरजेंसी ड्यूटी लगाई गई थीं। लेकिन उन्होंने एक भी इमरजेंसी ड्यूटी नहीं की। लगातार अनुपस्थित रहने पर जून से उनका नाम ड्यूटी चार्ट से हटा दिया गया है।
- लीव विदआउट पे के लिए पहले स्थानीय स्तर पर आवेदन करना पड़ता है। जिसे स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाता है। स्थानीय स्तर पर इसकी स्वीकृति नहीं दी जाती है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही लीव विदआउट पे मिल सकती है। इसके लिए कारण बताना जरूरी होता है। आमतौर पर पीजी, एमएस की पढ़ाई के लिए चिकित्सक ये अवकाश लेते हैं। डॉ. ब्रजेश ने लीव विदआउट पे के लिए आवेदन नहीं किया है।
- डॉ. एमसी गर्ग, सीएमओ
पंचायत चुनाव का कार्यक्रम
- 13 और 15 अप्रैल को नामांकन
- 18 अप्रैल को नाम वापसी
- 26 अप्रैल को मतदान
- 02 मई को मतगणना
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव का कार्यक्रम
- 26 जून को नामांकन
- 29 जून को नाम वापसी
- 03 जुलाई को मतदान और मतगणना