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मंदी की मार झेल रहे रियल एस्टेट की रियलिटी

Sun, 29 May 2016 11:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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रियल एस्टेट
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सब्जी - भाजी की तरह कालोनियों में फेरी लगाने के बाद भी 6000 फ्लैट्स को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। इनमें से तीन हजार फ्लैट्स अकेले प्राधिकरण हैं। जिन्हें कई बार विज्ञापन निकालने के बावजूद एमडीए बेच नहीं सका। आवास विकास को तो अपने फ्लैट्स बेचने के लिए बाकायदा कालोनियों में रिक्शा वालों से फेरी तक लगवानी पड़ी। प्राइवेट बिल्डर्स भी हर रोज नई स्कीमें ला रहे हैं। लेकिन रियल एस्टेट के डाउन फॉल का असर कुछ ऐसा है कि ग्राहक इनकी दहलीज तक पहुंचने को राजी नहीं। 
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पूरे देश में रियल एस्टेट मंदी के दौर से गुजर रहा है। फ्लैट्स की कीमत बढ़ने के बजाए स्थिर हो गई हैं। कई जगहों पर कीमतें तेजी से गिरी भी हैं। इस मंदी ने मुरादाबाद में फ्लैट कल्चर की कमर तोड़कर रख दी है। प्रापर्टी में निवेश करने वालों को नजरें प्लाट्स पर तो हैं लेकिन फ्लैट्स से इन्होंने किनारा कर लिया है। जिससे बिल्डर बेचैन हैं। नौबत ये है कि एमडीए और आवास विकास की जिन सरकारी योजनाओं में फ्लैट्स पाने के लिए भीड़ उमड़ती थी, वहां इक्का - दुक्का आवेदक दिखते हैं।

एमडीए ने समाजवादी आवास योजना के तहत नया मुरादाबाद, कांशीराम नगर, कुंदनपुर और एकता कालोनी में 1500 फ्लैट्स बनाए हैं। लेकिन छह बार आवंटन निकालने के बावजूद एमडीए महज 125 फ्लैट्स ही आवंटित कर पाया है। ये हालत तब है जब डबल बेडरूम वाले इन फ्लैट्स को एमडीए समाजवादी आवास के तहत सस्ती दर यानी औसत 10 से पंद्रह लाख रुपये तक में बेच रहा है। यही हाल आवास विकास का है। जिसे फ्लैट्स बेचने के लिए फेरी तक लगवानी पड़ गई। 
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एमडीए - आवास विकास से सस्ते प्राइवेट फ्लैट्स
मुरादाबाद। एमडीए और आवास विकास जिस दर पर फ्लैट्स बेच रहा है उससे कहीं कम दर पर प्राइवेट बिल्डर्स के फ्लैट्स बाजार में मौजूद हैं। इनकी लोकेशन भी एमडीए से बेहतर है और साज सज्जा भी। कमीशनखोरी की भेंट चढ़े एमडीए के फ्लैट्स से प्राइवेट बिल्डर्स की निर्माण की क्वालिटी भी बेहतर मानी जा रही है। लेकिन इसके बावजूद बिल्डर्स भी अपनी करीब 3000 यूनिट् को बेच नहीं पा रहे हैं। एक - दो को छोड़ दें तो बाकी अपार्टमेंट में पूरे के पूरे टावर खाली खड़े हैं। कई अपार्टमेंट में काम तक  नहीं चल रहा क्योंकि इन्हें ग्राहक नहीं मिले। ग्राहक नहीं मिले तो जाहिर है बिल्डर पर रकम नहीं आई और बिना रकम के प्रोजेक्ट भला आगे कैसे बढ़े। 
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