बढ़ती ठंड बच्चों और बुजुर्गों का सताने लगी है। दिन और रात के तापमान में बढ़ती नजदीकियों के बीच बच्चे हांफने लगे हैं तो बुुजुर्गों का दम फूलने लगा है। नौनिहालों में एलर्जिक ब्रोंकाइटिस की शिकायत बढ़ने लगी है। जबकि सांस और दमा के मरीज मुश्किल में आ गए हैं।
वहीं मौसम के बदलते तेवर ने हार्ट और बीपी के मरीजों संख्या बढ़ा दी है। डाक्टरों के मुताबिक बदलता मौसम में मरीज की सेहत ठीक नहीं है। बच्चों को सुबह शाम ठंड से बचाएं। वहीं दमा के रोगी अपने रूटीन में बदलाव लाए। पिछले हफ्ते की तुलना में सुबह शाम ठंड में इजाफा हुआ है।
अधिकतम तापमान 28 और 29 डिग्री सेंटीग्रेड है। जबकि न्यूनतम तापमान 12 और 13 डिग्री मांपा जा रहा है। दिन में मौसम गर्म सा रहता है। वहीं रात में एकदम से ठंड हो जाता है।
निमोनिया तक पहुंचा देती है लापरवाही
मुरादाबाद। बाल रोग विशेषज्ञ डा. वीएस दीक्षित बताते हैं कि इस मौसम में बच्चे एलर्जिक ब्रोंकाइटिस के शिकार हो रहे हैं। इसकी शुरुआत नोज इंफेक्शन से होती है। बच्चों में जुकाम के साथ बुखार की शिकायत होती है। संक्रामक बढ़ने पर बच्चाें को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और उनकी पसलियां चलने लगती है। बच्चे निमोनिया की जद में आ जाते हैं।जो मासूमों की सेहत के लिए खतरनाक है।
बदले मौसम में ढलने में दिक्कत
मुरादाबाद। फिजीशियन डा. नितिन बत्रा का कहना है कि मौसम बदल रहा है, लेकिन दमा रोगी अभी भी अपने पुराने रुटीन पर कायम है। सांस और दमा के मरीज बदलते मौसम में ढल नहीं पा रहे हैं। यही उनकी परेशानी का कारण बन रहा है। ऐसे मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। ऐसेेेे में जरूरी है कि मौसम के हिसाब से अपने को ढाल लें।
ब्रोंकाइटिस के लक्षण
- खांसी आना
- पसली चलना
- सांस लेने में दिक्कत
- बुखार आना
डॉक्टर की सलाह
- बच्चों को बाहर न ले जाएं
- मां का दूध पिलाएं
- बच्चों को सर्द-गर्म से बचाएं
- सेहत का खास ख्याल रखें
ये बीमारियां भी संभव
: मौसमी बुखार होना
: सांस फूलना
: सर्दी जुकाम होना
: दस्त होना
सलाह
: ठंडक से बचें
: अचानक सर्द-गर्म से बचें
: मार्निंग वाक पर गर्म कपड़े पहनकर जाएं।
: सुबह ठंडे पानी से न नहाएं
बढ़ती ठंड दिल के मरीजों के लिए खतरे की घंटी
मुरादाबाद। एमडी मेडिसिन डा. अमित रस्तोगी के मुताबिक बढ़ती ठंड दिल के मरीजों के लिए खतरे की घंटी है। इस मौसम में शरीर बाहरी वातावरण में ढलने की कोशिश करता है, लेकिन ऐसा तुरंत नहीं हो पाता है। शरीर को ढलने में वक्त लगता है। ऐसे में शरीर की रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जाती है। इस दौरान दिल की रफ्तार बढ़ने लगती है। यही हार्ट पेसेंट के लिए खतरनाक साबित होता है। तापमान में गिरावट के साथ ही ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
सलाह
- बीपी की दवाइयां बदलवा लें
- मार्निंग वाक पर गर्म कपड़े पहनकर निकलें
- अस्थमा के मरीज दवा हमेशा अपने पास रखें
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराते रहें
- डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवाओं का सेवन करें