मुरादाबाद। मम्मी मुझे बैटरी वाली ट्राई साइकिल मिली है, अब मुझे हाथ से पैडल मार कर ट्र्राई साइकिल चलाने से आजादी मिल गई है। खुशी में चहकते हुए यह शब्द दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के ई ट्राईसाइकिल वितरण कार्यक्रम में सुनाई दिए। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से शनिवार को विकास भवन में बैटरी चालित ट्राई साइकिल वितरण का समारोहपूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लाभान्वित हुए 51 दिव्यांगों के चेहरे खुशी में दमकते नजर आए।
ई ट्राइसाइकिल वितरण समारोह में मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने दस दिव्यांगों को ई ट्राईसाइकिल वितरित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर चौधरी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार समाज के सभी वर्गों के लोगों को आगे बढ़ाना चाहती है। केंद्र और राज्य सरकारों की प्राथमिकता में दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना भी शामिल है। दिव्यांग बैटरी चालित ट्राईसाइकिल के माध्यम से न सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपने कार्य से आसानी से जा सकेंगे बल्कि ट्राईसाइकिल से वह छोटे स्तर का रोजगार भी कर सकेंगे। अन्य दिव्यांग लाभार्थियों को जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह, एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त ने ई ट्राईसाइकिल वितरित कीं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिले में 80 प्रतिशत दिव्यांगता ग्रस्त व्यक्तियों (जो पैरों से चलने में असमर्थ हैं) को निशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल (बैटरी चालित) वितरण के लिए पंजीकरण किया गया था। इसके लिए 65 दिव्यांगों ने आवेदन किया था। जिला स्तर पर मुख्य चिकित्साधिकारी, उपसंभागीय अधिकारी व जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी की तकनीकी समिति ने आवेदकों का शारीरिक परीक्षण कर 51 दिव्यांगों का योजना के लिए चयन किया था। जिन्हें शनिवार को बैटरी चालित ट्राईसाइकिल वितरित की गई।
इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी आनंद वर्धन, पीडी, डीडीओ, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी आदि मौजूद रहे।
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मां, ट्राईसाइकिल मिल गई, अब तुम्हारी बेटी भी खुद कर सकेगी अपना काम
- बैटरी चालित ट्राईसाइकिल पाने के बाद खुशी से फूले नहीं समाए दिव्यांग
- फोन से घर वालों को दी सूचना, बोले-आवागमन के साथ रोजगार बढ़ाने में मिलेगी मदद
(फोटो)
मुरादाबाद। चलने फिरने से लाचार जिले के 51 दिव्यांगों को शनिवार बैटरी चालित ट्राई साइकिल मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। किसी ने अपनी मां को फोन कर इसकी जानकारी दी तो किसी ने परिवार के अन्य सदस्यों व मित्रों को। सबका यही कहना था कि अब वह भी आसानी से एक दूसरे स्थान पर आ जा सकेंगे। जो पहले से व्यवसाय नहीं कर रहे उनका कहना था कि अब वह भी कोई छोटा व्यवसाय करेंगे जिससे वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। जो पहले से कुछ काम कर रहे हैं तो वह कह रहे थे कि इससे उनका व्यवसाय काफी बढ़ने की उम्मीद है।
छजलैट थाना क्षेत्र के ग्राम भीकनपुर रवाना निवासी गुलशन नाज बचपन से दोनों पैरों से चलने फिरने से लाचार हैं। जमीन पर वह घुटनों और हाथ के बल चलती हैं। लेकिन दिव्यांगता को उन्होंने हर क्षेत्र में मात देने की कोशिश की। इसी तकलीफ के बीच उन्होंने एमए तक शिक्षा ग्रहण की। आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्होंने घर पर ही सिलाई की दुकान खोली है। लेडीज कपड़े सिल कर गुजारा करती हैं। सिलाई का सामान लाने तथा अन्य कार्यों से घर से बाहर आने-जाने में उन्हें काफी परेशानी होती थी। अब बैटरी चालित ट्राईसाइकिल मिलने पर उन्होंने सबसे पहले अपनी मां को फोन किया। कहा-मां ट्राईसाइकिल मिल गई है। अब वह बाहर आने-जाने का काम खुद कर सकेंगी।
डिलारी थाना क्षेत्र के ग्राम तगाली निवासी रोहित कुमार भी ई ट्राई साइकिल मिलने के बाद खुश नजर आए। रोहित ने बताया कि दो साल पहले एक ट्रक से एक्सीडेंट होने के बाद उसकी एक टांग काट दी गई थी। जिसके बाद उसने कृत्रिम पैर तो लगवा लिया, लेकिन चलने फिरने में काफी परेशानी होती थी। इंटरमीडिएट के बाद उसे इसी के चलते पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी। अभी तक वह कोई रोजगार भी नहीं कर पा रहा था। अब बैटरी चालित ट्राई साइकिल से वह कोई छोटा चलता फिरता रोजगार भी करने की सोच रहा है।
बिलारी क्षेत्र के सतारन निवासी शानू मलिक भी शारीरिक रूप से 80 फीसदी दिव्यांग हैं। वह पड़ोस के गांव में साइबर कैफे चलाकर अपनी जीविका चला रहे हैं। उन्होेंने बताया कि साइबर कैफे उनके घर से छह किमी दूर है। जिसके चलते उसे जाने-आने में काफी परेशानी होती थी। अब वह अपने घर से आसानी से साइबर कैफे जा सकेंगे और वापस घर आ सकेंगे। अब उन्हें अपना रोजगार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
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टायर में हवा न होने से परेशान हुए कुछ दिव्यांग
मुरादाबाद। ट्राईसाकिल वितरण कार्यक्रम के बाद दिव्यांग जब अपनी ट्राईसाइकिलों पर बैठे तो उनमें से कुछ ऐसी थीं जिनके अगले टायर में हवा नहीं थी। इसके कारण दिव्यांगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। समाज कल्याण कार्यालय पर हवा भरने का जो पंप मिला वह भी खराब था। इसके चलते उन दिव्यांगों को अपने साथ आए लोगों की मदद से ई ट्राई साइकिल बाहर ले जाकर उसमें हवा भरवानी पड़ी तब वह अपने गंतव्य को रवाना हो सके। कई ऐसे दिव्यांग भी थे जो अपनी ट्राईसाइकिल चलाने में काफी हिचक रहे थे। लिहाजा वह अपनी ट्राईसाइकिल को थ्री व्हीलर पर रखवा कर घर ले गए।