मुरादाबाद। धनतेरस पर शहर के मुख्य बाजार दिन भर जाम से जूझते रहे। टाउन हाल पर लगे मंगल बाजार और मुख्य बाजारों में सड़कों पर लगे फड़ और ठेलियों ने सड़कें जाम कर दीं। जबकि फड़ वालों के लिए लगाए गए नगर निगम के दीपोत्सव मेले में सन्नाटा पसरा रहा।
सरकार ने दीपावली पर लगने वाले ठेला, फड़, पटरी व्यापारियों के लिए इस बार दीपोत्सव मेले का आयोजन किया था। मकसद था इस मेले इन व्यापारियों को एक स्टॉल उपलब्ध हो जाए और वह त्योहार पर अपनी दुकान यहां लगा सकें। इसके पीछे एक उद्देश्य शहरों के मुख्य बाजारों से त्योहार पर इन फड़ों के कारण लगने वाले जाम से मुक्ति पाना भी था। नगर निगम ने दीपोत्सव मेले की योजना तो बनाई लेकिन उसकी योजना कारगर साबित नहीं हुई। तमाम कोशिशों के बाद भी नगर निगम के मेले में कोई दुकान नहीं लगी। रेहड़ी पटरी वाले आखिरकार उसी तरह परंपरागत तरीके से दुकान लगाते दिखाई दिए जैसे हर साल लगाते हैं।
दीपोत्सव मेले के लिए रामलीला मैदान को चुना गया था। जबकि शहर के मध्य में लगने वाले मंगल के बाजार, टाउन हाल, अमरोहा गेट, चौमुखा पुल पर शहर के अधिकांश लोग खरीदारी करने जाते हैं। ऐसे में साफ था कि रामलीला मैदान में मेला लगाना कारगर नहीं होगा। न ही नगर निगम की ओर से ठेला, रेहड़ी व्यापारियों को यहां तक लाने की कोई कवायद दिखाई दी। मेले में स्वयं सहायता समूहों को स्टॉल दिए गए हैं, जबकि रेहड़ी पटरी वाले यहां से गायब दिख रहे हैं।
मंगलवार को धनतेरस के बाजार में मुख्य बाजार की दुकानों के बाहर कई फड़ वालों ने दुकानें लगाईं थीं। जिस कारण मुख्य बाजार में जबरदस्त जाम था। हालत ये थी कि यहां पैर रखने की भी जगह नहीं थी। टाउन हॉल से लेकर अमरोहा गेट बाजार, गुरहट्टी, सराफा बाजार रोड पर भी फड़ और ठेले वाले खड़े थे। इस कारण निकलने की भी जगह नहीं थी। दिन में रुक-रुक कर जाम लगता रहा जबकि नगर निगम के मेले में स्ट्रीट वेंडर्स की दुकानें नाम मात्र को नजर आई। मेले के अंदर से ज्यादा बाहर सड़क पर ही ठेलियां और फड़ अधिक लगे थे। मुख्य बाजार के व्यापारियों का कहना है कि यदि नगर निगम दीपोत्सव मेले के लिए शहर के अंदर ही किसी स्थान को चुनता तो वहां फड़ व्यापारी भी आराम से पहुंच सकते थे और जाम की समस्या से भी निजात मिल सकती थी।
कोट
टाउन हॉल पर फड़ और ठेली लगाने वाले वेंडरों को मेले की सूचना दी गई थी। उनसे मेले में अपनी दुकानें लगाने का अनुरोध किया गया था। नगर निगम ने स्थान निशुल्क उपलब्ध कराया था। लेकिन उनका कहना था कि ये उनकी परंपरागत जगह है और यहां वे सालों से फड़ लगा रहे हैं। नई जगह दुकानदारी प्रभावित होगी। कोरोना की वजह से दो साल से उनका काम नहीं चल रहा था इस बार अच्छे काम की उम्मीद है इस वजह से उन्होंने अपनी परंपरागत स्थान पर ही दुकानें लगाईं। इसी वजह से मेले में फड़ वाले अपेक्षा के मुताबिक नहीं आए।
- अनिल कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त