डिलारी ब्लाक के रहटामाफी में चार दिन में सात लोगों की मौत की खबर से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। जहां कैंप लगाकर 117 मरीजों की सेहत की जांच की गई। साथ ही मलेरिया आशंकित तेरह मरीजों की स्लाइड तैयार की गई। स्वास्थ्य विभाग ने बुखार से सात मौत होने की बात से इंकार किया है। बुखार से सिर्फ एक मौत हुई हैैै। बाकी सभी मौतें बीमारी से हुई हैं।
चार दिन में सात लोगों की मौत की सूचना पर सोमवार को सीएचसी और जिले की टीम रहटामाफी पहुंची। टीम ने गांव का जायजा लिया। मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण किया। साथ ही उनकी काउंसलिंग भी गई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गांव पहुंची चिकित्सकों की टीम ने करीब 117 लोगों की जांच की। मलेरिया से ग्रस्त होने की आशंका के चलते 13 रोगियों के खून की स्लाइड तैयार की।
इसमें 70 रोगी वायरल फीवर, 20 चर्म रोग से पीड़ित और 27 अन्य रोगों से पीड़ित हैं। सभी को दवाई वितरित की गई। सीएमओ डा. संजीव यादव ने बताया कि रहटामाफी में बुखार का प्रकोप जरूर है। लेकिन यहां बुखार से सिर्फ एक मौत हुई है। इसके अलावा मरने वाले सभी ग्रामीण किसी ना किसी बीमारी से पीड़ित थे।
किसी कैसे ही हुई मौत
- कौशल कुमार को 20 अगस्त को बुखार आया था, इलाज से पहले उसकी मौत हो गई
- मोहम्मद आरफीन (45) पुत्र मुजफ्फर करीब चार माह से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे। उनका दिल्ली में इलाज चल रहा था। 19 अगस्त को घर आते समय रास्ते में उनकी मौत हुई
- सौ साल की चंद्रवती पत्नी सीताराम की 21 अगस्त को स्वाभाविक मौत हो गई, वह किसी रोग से पीड़ित नहीं थी। - - चंद्रपाल (65) पुत्र बहाल सिंह एक साल से हेपेटाइटिस बी रोग और कैंसर से पीड़ित थे। 13 अगस्त को घर पर उनकी मौत हो गई।
- बबली (42) पुत्र चंदन सिंह कैंसर पीड़ित थी। 20 अगस्त को आपरेशन के समय एक मेडिकल कालेज में उसकी मौत हो गई।
- छिददा (60) पुत्र करीम बक्स करीब दो वर्ष से लकवा से पीड़ित थे और उनका उपचार किसी नीम हकीम के पास चल रहा था, सोलह अगस्त को दम तोड़ दिया।
गांव में गंदगी तो क्यों ना फैले बीमारी
ब्लाक मुख्यालय से मात्र चार किलोमीटर दूरी पर गांव रहटामाफी का मुख्य रास्ता हो या गलियां। हर जगह कूड़ों का ढेर लगा है। जगह-जगह फैले से कीचड़ से दुर्गंध उठता है। ऐसे में यहां बीमारी क्यों ना फैले। गांव में बड़ी संख्या में लोग बीमार से पीड़ित हैं।
गांव के मुख्य रास्ते पर कूड़े के ढेर लगे हैं। गांव में जगह-जगह कीचड़ है। रहटा माफी गांव निवासी रफीकन (55) पत्नी दूलेहसन ने बताया कि वह पांच दिन से बुखार से पीड़ित है। गांव के ही एक चिकित्सक से वह दवा ले रही है पर स्वास्थ्य लाभ नहीं हुआ। अब्दुल गनी (60) पुत्र मुराद भी तीन दिन से बुखार से पीड़ित हैं। शकुंतला पत्नी धर्मपाल सिंह ने बताया कि उन्हें उल्टी की शिकायत हुई उसके बाद गले में हल्का दर्द और साथ में बुखार, हाथ और पैरों में दर्द की शिकायत हुई।
प्राइमरी स्कूल की कक्षा तीन की छात्रा मुस्कान को पता चला की प्रधान जी के यहां दवाई वितरित की जा रही है तो वह भी दवा लेने के लिए पहुंची। उसने बताया कि वह कई दिनों से बुखार से पीड़ित है और स्कूल जा रही है। रानी पुत्री शाहिद को ईद से बुखार आ रहा था। बीच में वह ठीक हो गई। लेकिन फिर से वह बुखार की चपेट में आ गई है। नाजरीन पत्नी जहीर की बच्ची शिफा भी करीब 11 दिन से बुखार में तप रही है।