सीआरपीएफ के कारतूसों के साथ पकड़े गए मास्टरमाइंड जितेंद्र को पुलिस रिमांड पर लेकर सोमवार को मुरादाबाद पहुंची। उसके साथ रामपुर के अलावा मुरादाबाद में कई स्थानों पर दबिश दी। इस दौरान टीम को पता चला कि मुरादाबाद का विनय कुमार नाम का शख्स मेन सप्लायर है। जो आर्मोरर जितेंद्र को कारतूस देता था। जितेंद्र ये कारतूस नक्सलियों को सप्लाई करता था। हालांकि विनय की अभी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
रामपुर सीआरपीएफ में तैनात आर्मोरर जितेंद्र सिंह उर्फ डबल सिंह को बनारस पुलिस ने 21 जुलाई की रात बनारस स्टेशन से जीआरपी ने करीब 2500 एके-47 और इंसास के कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही उसका बेटा राजा बाबू और भतीजा राजनयन भी गिरफ्तार कए गए। पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की। तब ये सभी जेल में बंद हैं। सोमवार को एक बार फिर से रिमांड पर लेकर जांच टीम सोमवार को रामपुर पहुंची।
रामपुर में उन्होंने कई स्थानों पर लेकर गई। इस दौरान टीम उन स्थानों पर भी गई, जहां बैठकर डीलिंग, सप्लाई और पेमेंट पहुंचाया जाता था। वहीं कुछ लोगों से पूछताछ भी हुई। टीम डबल सिंह को लेकर मुरादाबाद आई। यहां भी उसके बताए गए स्थानों पर लेकर गए। दिन भर की परेड के बाद टीम को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। मामले की जांच कर रहे एसआई एसएस आदर्श ने बताया कि कारतूस की सप्लाई में कई और लोग भी शामिल हैं।
अभी तक पता चला है कि मुरादाबाद का विनय कुमार डबल सिंह को कारतूस सप्लाई करता था। कारतूस इकट्ठा करने का काम डबल सिंह का बेटा और भतीजा करते थे। इसके बाद डबल सिंह इन सभी कारतूस को पहुंचाने का काम करता था। डबल सिंह पकड़ी गई खेप से पहले तीन बार और बड़ी खेप की सप्लाई कर चुका है। डबल सिंह किसको कारतूस पहुंचाता था इसका खुलासा उसने अभी नहीं किया है। हालांकि उसके भतीजे राम नयन ने बताया कि कारतूस नक्सलियों को बेचे जाते थे। वे एक बार में हजारों कारतूस किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार रहते हैं।
नक्सलियों को ढाई हजार में बेचता था एक कारतूस
अभी तक की जांच में सामने आया है कि डबल सिंह सीआरपीएफ के रिकार्ड में गड़बड़ी कर कारतूस की हेराफेरी करता था। इसके अलावा वह विनय सिंह से कारतूस खरीदता था। विनय कहां से कारतूस लेता था इसके बारे में पता नहीं चल पाया है। डबल सिंह ने बताया कि वह विनय सिंह से 250 रुपये में कारतूस खरीदता था। महीनों में इकट्ठे करने के बाद नक्सलियों को पहुंचाता था। इसके बदले में वह एक कारतूस के 2500 रुपये वसूलता। हालांकि अभी तक तीन बार सप्लाई की बात ही सामने आई पाई है। जिसमें वह नक्सलियों को करीब आठ हजार कारतूस पहुंचा चुका है। इससे उसने अपने गांव में अच्छी खासी संपत्ति भी इकट्ठा कर ली है। जांच अधिकारी एसएस आदर्श ने बताया कि विनय सिंह गिरफ्तारी के बाद ही पता चल पाएगा के उसके पास कारतूस कहां से आते हैं। साथ ही यह भी पता चल पाएगा कि उसने डबल सिंह को कितने कारतूस सप्लाई किए।