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इंसाफ मांगा तो पोती पर दर्ज कराया हत्या का मुकदमा

Thu, 21 Jan 2016 08:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
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रिटायर्ड आईटीएस अफसर एसएल भारती के बेटे राजेंद्र भारती की पांच साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अभी तक रहस्य बनी हुई है। घटना को पांच साल बीतने के बाद वाकये की इकलौती चश्मदीद राजेंद्र भारती की बेटी मालविका भारती ने पिता की मौत को हत्या बताते हुए अपने दादा और ताऊ के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है।
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वहीं पोती के कदम से सकते में आए सेवानिवृत्त अफसर ने पोती और बहू के खिलाफ ही बेटे की हत्या का मुकदमा ठोंक दिया है। मामले की तह तक जाने के बजाए रिटायर्ड अफसर के रसूख तले दबी सिविल लाइंस पुलिस विधवा और उसकी बेटी को जेल भेजने की धमकियां दे रही है। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त महानिदेशक (फारेन ट्रेड) के पद से सेवानिवृत्त हुए भारतीय व्यापार सेवा के पूर्व अफसर सगुआ लाल भारती सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में जिगर कालोनी में रहते हैं।


यह घटना 24 सितंबर 2010 की है। मकान के द्वितीय तल पर रहने वाले एसएल भारती के छोटे बेटे राजेंद्र भारती की लाश फांसी पर लटकी मिली थी। तब बिस्तर से उठने में असहाय राजेंद्र की बीमार नाबालिग बेटी मालविका भारती पास में ही बिस्तर पर पड़ी थी और उसने पूरा घटनाक्रम अपनी आंखों से देखा था।
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उस वक्त इस मौत का आत्महत्या बताकर इसकी फाइल बंद कर दी गई थी। लेकिन 28 मई 2015 को मालविका ने सीजेएम कोर्ट में याचिका दाखिल करके आरोप लगाया कि उसके पिता ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि उन्हें उसके दादा एसएल भारती, ताऊ अशोक भारती और ताई सरिता भारती ने मिलकर फांसी पर लटकाया था। मालविका की इस याचिका का निस्तारण होना अभी बाकी है।


लेकिन इस बीच पोती के कदम से घबराए एसएल भारती ने अपनी पोती मालविका और बहू जागृति पर ही राजेंद्र की हत्या का मुकदमा कर दिया है। जिसमें आरोप है कि बहू जागृति ने ही अपनी बेटी मालविका व एक अन्य बाहरी शख्स के साथ मिलकर अपने पति राजेंद्र भारती की हत्या की थी।
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