जिले की बेशकीमती 539 शत्रु संपत्तियों को ऑन लाइन नीलाम करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी की जा रही है। पुराने शहर में जर्जर मकान, पुरानी दुकान और खेतों का मूल्यांकन करने में अफसरों की टीम जुटी हुई है। फरवरी केअंत तक मूल्यांकन केबाद ब्यौरा तैयार करके विदेश मंत्रालय के शत्रु संपत्ति विभाग को भेज दिया जाएगा।
देश में शत्रु संपत्ति पर हो रहे अवैध कब्जों के कारण केंद्र सरकार ने मुरादाबाद सहित प्रदेश के सभी जिलों की शत्रु संपत्ति को बेचने का निर्णय लिया है। अब तक ये संपत्तियां बहुत कम रुपयों पर किराए हैं। ऐसे में सरकार ने इनको बेचकर एक मुश्त धनराशि अर्जित करने का निर्णय लिया है। उसी के तहत आन लाइन नीलामी केलिए जिला प्रशासन से ब्योरा मांगा गया है।
एडीएम प्रशासन लक्ष्मी शंकर सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर इन संपत्तियों के मूल्यांकन की टीम बनी है। जिसमें संबंधित क्षेत्र के सब रजिस्ट्रार, लोक निर्माण विभाग और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण केअधिशासी अभियंता। तहसीलदार को शामिल किया गया है। यह समिति स्थलीय सत्यापन के साथ-साथ नीलामी के लिए मूल्यांकन भी कर रही है। जिससे 15 फरवरी तक रिपोर्ट मांगी गयी है। उसी केबाद यह ब्योरा केंद्र सरकार केविदेश मंत्रालय को भेज दिया जाएगा। केंद्र सरकार इस संपत्ति को ब्रिकी तथा नीलामी के लिए ऑन लाइन करेगी। आन लाइन नीलामी का उद्देश्य बिक्री में पारदर्शिता बनाना है।
195 संपत्ति हैं विवादित
मुरादाबाद। 539 शत्रु संपत्तियों में से करीब 195 संपत्ति का विवाद स्थानीय अदालत से लेकर शीर्ष अदालत तक में विचाराधीन है। इनमें अधिकांश संपत्ति पुराने शहरी बताई गई है। जिनमें जर्जर मकान और दुकान शामिल हैं। कुछ खेत भी हैं। अधिकांश विवाद इन संपत्तियों को पाकिस्तान भागने वाले लोगों की ओर से बिक्री करना दिखाया गया है। जबकि सरकार का मानना है कि ऐसा नहीं हुआ है, खाली जमीन, मकान और खेत देखकर आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया और उनकी ओर से फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए थे।
ये है शत्रु संपत्ति
मुरादाबाद। आजादी के बाद 1950 में भारत से पाकिस्तान गए लोगों को शत्रु घोषित किया गया था। उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया गया और उसे शत्रु संपत्ति घोषित उनकी देखरेख की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी थी। उन दिनों इन संपत्तियों पर लोगों ने कब्जे कर लिए। कुछ लोगों ने कब्जे कर अपने नाम से फर्जी किराएनामा भी दिखाया था। ऐसे विवाद लंबे समय से चले आ रहे हैं।