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न पुलिस आई न गांव वालों ने की मदद, रातभर शव की देखभाल करती रहीं बेटियां

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मुरादाबाद(अभिषेक सिंह)।
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सुनीता की हत्या के बाद लहूलुहान शव की सुरक्षा के लिए बारिश में रात भर बेटियां जागती रहीं। घर में दरवाजा नहीं है, दीवार टूटी होने के कारण कुत्ते घुस आए और सुनीता के शव के चारो ओर मडराते रहे। अंधेरी रात में बच्चियां कुत्तों को शव के पास से बार-बार भगाती तो वह भौंक भौंक कर डराते रहे लेकिन हार नहीं मानी और घर में रखे छोटे से डंडे से उनका मुकाबला करती रहीं।
इन बच्चियों ने चंद मिनटों पहले ही हत्यारों का सामना किया था। इसके बावजूद भी वह हिम्मत नहीं हार रही थीं। मदद के लिए कभी पुलिस तो कभी गांव वालों को फोन कर रही थीं लेकिन कोई भी उनकी मदद के लिए नहीं आया। सुबह हुई तो पुलिस पहुंची लेकिन ग्रामीण नहीं आए। ननिहाल से रिश्तेदार लोग आए तो वह उनसे लिपट कर रोनी लगीं। नानिहाल से आए रिश्तेदारों ने ही पंचनामा से लेकर सभी औपचारिकताएं पूरी कराईं।
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गोली चलने की आवाज से खुली नींद तो हमलावरों से भिड़ीं बेटियां
मुरादाबाद। सुनीता की बेटी प्रियंका ने बताया कि जब बाबा, चाचा सहित अन्य लोग उसके घर में घुसे तो वह मां से थोड़ी दूर दूसरी चारपाई पर सो रही थी। उसी समय गोली चलने की आवाज पर उसकी आंख खुली तो चिल्लाना शुरू किया। वह मां को हमलावरों से बचाने के लिए भागी, उनसे लिपटी और गोली चलाने से रोकने की कोशिश की तो बाबा घलेंद्र सिंह ने उसको पकड़ लिया। गला दबाने की कोशिश करने लगे, विरोध किया तो उसको डंडों से पीटा। उसी समय पूजा, हर्षिता और प्रियांशी की भी नींद खुल गई थी। आरोपियों ने धमकी दी कि उनके बारे में किसी को भी जानकारी न दें, वरना जान से मार देंगे। इसके बाद आरोपी घर से भाग गए।

आवाज लगाई तो दरवाजा नहीं खोला, फोन भी किया बंद
मुरादाबाद। हमलावरों के जाने के बाद घर चारों बेटियों की चीख पुकार की आवाज से गूंजने लगा। वह गांव वालों से मदद मांगती रहीं कि उनकी मां को अस्पताल ले जाएं। कोई भी मदद के लिए नहीं आया। रात के अंधेरे में वह घरों के बाहर खडे़ होकर आवाज लगाती रहीं, किसी को भैया कहतीं तो किसी को दादा कहकर मदद मांगतीं लेकिन कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकला। इसके बाद गांव के कई लोगों को फोन किया लेकिन मानों वह जान बूझकर फोन उठाना ही नहीं चाह रहे थे, घंटी बज रही थी लेकिन फोन उठाने के बजाय दो लोगों ने स्विच ऑफ कर लिया। 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी लेकिन कोई मदर को पुलिस नहीं पहुंची।
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सुनीता के मायके वाले पहुंचे तो भरा गया पंचनामा, ग्रामीण नहीं आए
मुरादाबाद। ग्रामीण इलाकों में 20 से 25 मिनट के भीतर घटना की सूचना पर पहुंचने का दमखम भरने वाली यूपी पुलिस की पीआरवी मां की मौत के बाद बेबस चार बेटियों की मदद के लिए निर्धारित समय पर नहीं पहुंची। दो से तीन घंटे का समय बीतने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, तब तक अंधेरा छटने लगा था। पुलिस के देरी से पहुंचने पर बेटियों ने नाराजगी जाहिर की। पुलिस वालों ने उनको समझाकर शांत करने का प्रयास किया। कुत्तों को भी घर से भगाया। इसके बाद सुबह आठ बजे तक वहां पर पुलिस बल तैनात रहा। सुनीता के मायके वाले पहुंचे तो शव का पंचनामा भरा जा सका, ग्रामीण पंचनामा भरवाने भी नहीं आए।
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