मुरादाबाद। आहूजा ग्रुप के एमडी मनोज आहूजा की सुपारी के प्रकरण में पुलिस 12 दिन बाद भी साजिश का पूरी तरह राजफाश करने में नाकाम है। तीन मोहरों को जेल भेजने के बाद मुख्य आरोपी हरिओम अग्रवाल को थाने से छोड़कर पुलिस सवालों से घिरी है। पीएमएस ट्रस्ट को लेकर पहले से कुछ लोगों ने मुकदमे कर रखे हैं। इसके अलावा पूर्व में ट्रस्ट से निकाले गए 15 निर्यातकों को लेकर भी पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई। लेकिन तह तक पहुंचने से पहले ही पुलिस ने हथियार डाल दिए। साजिश के राज हरिओम की गिरफ्तारी से खुलेंगे लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ने में खुद को नाकाम बता रही है।
मनोज आहूजा की हत्या के लिए एक करोड़ रुपये की सुपारी देने के आरोपी पीएमएस के पूर्व डायरेक्टर हरिओम अग्रवाल को पुलिस ने तीन दिन तक थाने पर बैठाए रखा था। लेकिन बाद में जब अभियुक्तों के चालान की बारी आई तो सिर्फ तीन कथित शूटरों को जेल भेजा गया। मुख्य आरोपी होने के बावजूद हरिओम को थाने से छोड़ दिया गया। इसे लेकर पुलिस पर कई गंभीर सवाल खड़े हैं। मामला पीएमएस की अरबों रुपये की प्रापर्टी और करोड़ों रुपये महीने की आमदनी से जुड़ा है। अब पुलिस हरिओम की तलाश में छापामारी के दावे कर रही है। उनकी गिरफ्तारी से ही साफ होगा कि साजिश में और कौन - कौन शामिल था। ट्रस्ट से जुड़े मुकदमे और पूर्व में निकाले गए लोग भी पुलिस जांच के दायरे में हैं। इस बीच फ्रांस से मुरादाबाद पहुंचे हरिओम के बेटी - दामाद आहूजा ग्रुप से संपर्क कर समझौते की कई नाकाम कोशिशें कर चुके हैं। माना जा रहा है कि इसी वजह से पुलिस की जांच सुस्त हो गई है। मंगलवार को जेल में बंद तीनों कथित शूटरों की जमानत अर्जी पर सुनवाई होगी।