जिगर कालोनी से जामा मस्जिद तक रामगंगा के भीतर हुए 2500 से अधिक अवैध निर्माणों ने रामगंगा की धार को समेट दिया है। दसवां घाट के पास रामगंगा के भीतर कई पीतल फैक्ट्रियां तक बनाकर खड़ी कर दी गई हैं। काली मंदिर, नवाबपुरा और जामा मस्जिद के आसपास दर्जनों अवैध बस्तियां रामगंगा की धार में देखते - देखते बस गईं। इन अवैध निर्माणों को न तो एमडीए ने रोका और न ही नगर निगम ने। अवैध निर्माणों की वजह से ही मामूली बारिश में भी रामगंगा उफनती नजर आती है।
नागफनी थाना क्षेत्र में जिगर कालोनी में नट बाबा मठ मंदिर के पीछे से रामगंगा पर अवैध कब्जों का सिलसिला शुरू होता है। आगे दसवां घाट, नवाबपुरा और काली मंदिर से लेकर जामा मस्जिद तक रामगंगा की धार में बेखौफ होकर लोगों ने अवैध निर्माण किए हैं। अफसरों की नाक तले यहां छोटी - छोटी अवैध टाप टप्पर बस्तियां बसती चली गईं। समय के साथ पक्के निर्माण हुए। अब स्थिति यह है कि नबावपुरा, दसवां घाट के पास रामगंगा की धार में अवैध फैक्ट्रियां तक बन चुकी हैं। नवाबपुरा और दसवां घाट में रामगंगा के भीतर बनी इन अवैध फैक्ट्रियों के निर्माण को न तो एमडीए ने रोका और न ही नगर निगम ने। तीन साल पहले नगर निगम ने यहां अभियान चलाकर अवैध निर्माण तोड़े थे। उसके बाद इन्हें तोड़ने की कोशिश भी कभी नहीं हुई। जामा मस्जिद इलाके में अभी भी रामगंगा के भीतर अवैध निर्माणों का सिलसिला जारी है। इन्हें रोकने की कोशिश किसी भी विभाग की ओर से नहीं की जा रही है।
गांगन को भी ‘खा’ गईं अवैध फैक्ट्रियां
मुरादाबाद।
गांगन नदी का वजूद भी अवैध फैक्ट्रियों के नीचे खत्म हो चुका है। गांगन नदी के कलेजे पर 2000 से अधिक अवैध फैक्ट्रियां बन चुकी हैं। किसी भी नदी की धार से 50 मीटर की दूरी तक कोई भी निर्माण नहीं हो सकता। इस नियम को ताक पर रखकर गांगन नदी के भीतर तक फैक्ट्रियां बना दी गईं। गांगन नदी के पास के ग्रीन बेल्ट को भी कंकरीट में बदल दिया गया। यह सभी निर्माण बगैर एमडी से मानचित्र स्वीकृत कराए अवैध रूप से किए गए। इसके बावजूद एमडीए ने इन फैक्ट्रियों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की। पूरा एक्शन सिर्फ नोटिस जारी करने तक सिमटा रहा। गांगन को कब्जा मुक्त कराने की कोई योजना भी फिलहाल प्रशासन या किसी महकमे के पास नहीं है।