मुरादाबाद। लोकसभा चुनावों में सोशल साइट्स पुलिस - प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। तमाम झूठे सच्चे संदेशों के साथ ही सोशल साइट्स पर दौड़ रही भड़काऊ सामग्री पुलिस की परेशानी का सबब बन गई है। चुनाव के मौके पर सोशल साइट्स पर डाली जा रही आपत्तिजनक और सांप्रदायिक सामग्री के सियासी कनेक्शन से अफसर इंकार नहीं कर रहे हैं। हाल ही में हुई दो घटनाआें ने पुलिस को चौकन्ना कर दिया है। दोनों घटनाओं में गिरफ्तार लोगों ने अपने ही धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट की थीं। इसे माहौल बिगाड़ने की साजिश के साथ ही ध्रुवीकरण के हथियार के तौर पर भी एजेंसियां देख रही हैं।
माहौल में पलीता लगाने की कोशिश करने वालों में वह लोग भी उजागर हुए हैं जिन्हें पुलिस ने अमन पसंद शहरी मानकर शांति समिति की सूची में शामिल किया था। नागफनी पुलिस द्वारा बनाए गए डिजिटल वालंटियर्स व्हाट्सएप ग्रुप पर शुक्रवार रात को मुस्लिम धर्म के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट करने वाला खुद मुस्लिम समुदाय का ही युवक यूनुस अली निकला। जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले इस पोस्ट को लेकर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों में जबरदस्त आक्रोश था। इसके विरोध में भीड़ थाने पर भी जुटी थी। ब्रास आइटम का व्यापार करने वाले यूनुस अली ने यह तो बताया कि उसने हंगामा होने से पहले ही पोस्ट डिलीट कर दी थी। लेकिन पुलिस उससे इसके पीछे की मंशा को फिलहाल नहीं उगलवा सकी है। अभी कुछ दिन पहले भोजपुर थानाक्षेत्र में भी इसी तरह से एक आपत्तिजनक पोस्ट सोशल साइट्स पर आने के बाद हंगामा हुआ था। पुलिस ने तफ्तीश की तो पोस्ट डालने वाला मुस्लिम समाज का ही एक युवक निकला। ऐन चुनाव के मौके पर इस तरह की घटनाएं सामने आने से पुलिस - प्रशासन और खुफिया तंत्र सकते में है। इसे चुनाव के समय पर माहौल बिगाड़ने की साजिश के तौर पर देखा जा रहा है।
तीन दिन पहले कुंदरकी में खेतों में गोवंशीय पशुओं के कटान और संभल में एक धर्म स्थल में गोवंशीय पशु का मांस डाले जाने की घटनाओं ने पुलिस अफसरों और खुफिया एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है।