संभल जनपद के दस साल पुराने दरोगा को जिंदा जलाने की कोशिश के मामले में अदालत ने चार मुलजिमों को दोषी करार देते हुए दस-दस साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि 36 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। संभल क्षेत्र में अब से करीब दस साल पहले एसआई ओम शर्मा ने मुकदमा दर्ज कराया था कि वह वारंटी मुन्ना का वारंट तामील कराने गये थे। मुखबिर की सूचना पर उन्हें पता चला कि मुन्ना कबाड़ी की दुकान पर बैठा है। जब पुलिस टीम उसे पकड़ने के लिये मौके पर पहुंच गई।
वहां मुन्ना के अन्य साथी मौजूद थे। जिन्होंने एसआई ओम शर्मा का विरोध किया और लगभग एक दर्जन लोगों ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया। कबाड़ में आग लगाकर उन्हें फेंकने का प्रयास किया। जिन्हें पुलिसकर्मियों ने आकर बचाया। इस मामले की रिपोर्ट थाना संभल में वर्ष 2007 में बब्लू उर्फ तनवीर, शानू, शारिक, फाजिल, उमर दराज, अनीसउद्दीन, अकबर, शकील, सलीम, कदीर अहमद, गुड्डू, व राजू के खिलाफ दर्ज कराया गया था।
जिसमें राजू की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। बब्लू, मुन्ना, शानू, व उम्रदराज के मुकदमे की सुनवाई एडीजे 13 एमपी सिंह की अदालत में हुई। शेष आरोपियों की सुनवाई दूसरे न्यायालय में विचाराधीन है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रणजीत सिंह राठौर ने सरकार की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने चारों मुलजिमों को दलीलें दीं। अदालत ने चारों मुलजिमों को दोषी करार देते हुए दस दस साल की कैद की सजा सुनाई है।