यूपी बोर्ड में परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा देने वाले फर्जी परीक्षार्थी को अदालत ने चार साल के कारावास का फैसला सुनाया है। उसे 20 हजार रुपये जुर्माना भी देना होगा। मुरादाबाद में यह अपनी तरह का पहला मामला है जब किसी फर्जी परीक्षार्थी को अदालत ने सजा सुनाई है।
सात साल पुराने इस मामले में हाजी झंडा इंटर कॉलेज काजीपुरा के तत्कालीन केंद्र व्यवस्थापक ने रिपोर्ट लिखाई थी। मंगलवार को एसीजेएम-पंचम की अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
2009 की यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में 17 मार्च को हाजी झंडा इंटर कॉलेज काजीपुरा में देशवीर पुत्र सोबरन सिंह निवासी चांदपुर मंगोल थाना कुंदरकी जनपद मुरादाबाद को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर युवराज सिंह के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। केंद्र व्यवस्थापक सुरेंद्र पाल सिंह ने थाना कुंदरकी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एसीजेएम-05 अनु सक्सेना की अदालत में इसका ट्रायल चल रहा था। राज्य की ओर से अभियोजन अधिकारी अजीत सिंह ने पक्ष रखा। मंगलवार को देशवीर को दोषसिद्घ पाए जाने पर अदालत ने धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में चार-चार वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। देशवीर अभी तक जमानत पर था। सजा सुनाए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।