मुरादाबाद। गांव की सरकार का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। एक सप्ताह बाद मुरादाबाद मंडल के संभल, अमरोहा, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर व मुरादाबाद जिले की सभी 3692 ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। पंचायतों की बागडोर प्रशासक के हाथ में जाना लगभग तय है लेकिन अभी तक शासन ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
चाहे मौजूदा ग्राम प्रधान हों, या फिर प्रधानी के लिए कई महीनों से मेहनत कर रहे दावेदार, हर कोई यही जानना चाहता है कि अब गांव की सरकार के संचालन की व्यवस्था क्या होगी। मुरादाबाद की 643, अमरोहा की 576, संभल की 670, रामपुर की 680 और बिजनौर की 1123 सहित कुल 3692 ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के अनुसार अभी तक शासन ने पंचायतों के संचालन की नई व्यवस्था के बारे में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है।
पंचायत राज व्यवस्था से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश सरकार इस पर मंथन जरूर कर रही है। भले ही समय पर पंचायत चुनाव न कराने के पीछे पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं होने, मामला कोर्ट में होने या फिर कुछ अन्य कारण बताए जा रहे हों लेकिन जानकारी मानते हैं कि अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए सरकार पंचायत चुनाव के बाद की गुटबाजी का रिस्क लेना चाहती।
दूसरी ओर सरकार इस बात पर भी मंथन कर रही है कि मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने या उनकी अध्यक्षता में समिति गठित कर संचालन का अधिकार देने से गांवों में तैयारी कर रहे दावेदार कहीं नाराज न हो जाएं, क्योंकि इनकी संख्या मौजूदा प्रधानों से कहीं अधिक है।
दूसरा विकल्प एडीओ (पंचायत) को प्रशासक बनाकर पंचायत सचिव के माध्यम से संचालन कराने का तो है ही।
फिलहाल तो पंचायतराज मंत्री कई बार प्रधानों की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को ही पंचायतों के संचालन के लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार देने की बात कह चुके हैं। इसलिए अधिक संभावनाएं इसी व्यवस्था के किए जाने की हैं।