उत्तर प्रदेश जिला सहकारी बैंक में हुए घोटाले के खुलासे ने हलचल मचा दी है। कई स्तर पर जांच की गई है। विभिन्न मदों में कई करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। सहायक निबंधक के स्तर से की गई जांच में तत्कालीन सचिव एसके शर्मा को दोषी मानते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
बताया जा रहा है कि शासन स्तर से एक और जांच कराई गई है। 32 में से 11 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पिछली सरकार के दबाव में किए जाने की पुष्टि हुई थी। चर्चा है यह भर्तियां भी निरस्त की जा सकती हैं। सहकारिता चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में जिला सहकारी बैंक में करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया है।
सहायक निबंधक के स्तर से की गई जांच में पुष्टि हुई है कि घाटे में चल रहे बैंक को अनियमित ढंग से लाभ में दिखाया गया है। लाखों रुपये की स्टेशनरी खरीदी गई, जिसका उपयोग नहीं हो सका। पिछली सरकार के दबाव में एटा, मैनपुरी और इटावा के 11 अभ्यर्थी भर्ती किए गए।
निर्धारित फर्मों से कंप्यूटरों की खरीद नहीं की गई। इस जांच रिपोर्ट के बाद शासन ने एसके शर्मा के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही शुरू कर दी है। शासन स्तर से भी एक कमेटी गठित कर जांच कराई गई है। बताया जा रहा है कि शासन स्तर से कुछ दिन में बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। गौरतलब है कि एसके शर्मा वर्तमान में बरेली जिला सहकारी बैंक में जनरल मैनेजर/सीईओ के पद पर तैनात हैं।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता दीपक सिंह ने बताया कि जिला सहकारी बैंक में सामान की खरीद-फरोख्त और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्तियों को लेकर की गई शिकायतों की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। अनुशासनिक कार्यवाही शुरू की गई है। शासन के निर्देश का इंतजार है।
संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक सहकारिता विनोद कुमार ने बताया कि जिला सहकारी बैंक में सामान की खरीद-फरोख्त और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्तियों को लेकर की गई शिकायतों की जांच चल रही है। सहायक निबंधक ने जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जांच पूरी होने से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता।
मुख्यमंत्री को लिखा चेयरमैन का पत्र चर्चा में
जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन राजेश सिंह यादव ने नवंबर माह में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके अध्यक्ष रहते हुए पिछले पांच साल में बैंक ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। बैंक में कोई भ्रष्टाचार न हो इसके लिए सतत प्रयास किए। राजनीति को व्यवसाय नहीं अपितु सेवा माना है।
पिछले 25 वर्षों की जांच करा ली जाए यदि मैं कहीं भ्रष्ट पाया जाता हूं तो मुझे दुनिया की सबसे बड़ी सजा दी जाए। सरकार के एक मंत्री अदृश्य रूप से मेरा उत्पीड़न कर रहे हैं। एसके शर्मा ने बैंक के लिए अपने आप को पूरी तरह समर्पित रखा है। मुझे शर्मा की पैरवी नहीं करनी लेकिन यह अवगत कराना अपना नैतिक दायित्व समझता हूं कि शर्मा का कार्यकाल सराहनीय रहा है। वह एक ईमानदार और समर्पित अधिकारी रहे हैं।