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Corona Virus: बेटा कोरोना मरीजों का इलाज कर रहा है, यह जानकर क्या बोलीं डॉक्टर की मां

Tue, 14 Apr 2020 10:12 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
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कोरोना वायरस डाक्टर्स (सांकेतिक) - फोटो : social media
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कोरोना संकट के इस दौर में देश के डॉक्टर और तमाम मेडिकल कर्मचारी युद्ध स्तर पर देश सेवा में लगे हुए हैं। कई डॉक्टर ऐसे हैं जो महिनों से अपने घर नहीं जा पाए हैं, या घर जाने के बाद भी खुद को क्वारंटीन कर लिया है। कई मेडिकल कर्मचारी दिन रात एक कर मरीजों के इलाज में लगे हुए हैं। 

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कुछ डॉक्टर्स तो ऐसे हैं जो मरीजों की सेवा करते करते खुद भी संक्रमित हो गए। ऐसे अपनी जान को खतरे में डालकर इस महामारी से लड़ रहे एम्स के दो डॉक्टरों से अमर उजाला की टीम ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि इन दिनों कैसी बीत रही है उनकी जिंदगी-

डॉ. सायन नाथ
डॉक्टर सायन नाथ ने बताया कि उनकी ड्यूटी एम्स के कोविड-19 के आईसीयू में है। पिछले 20 दिनों से कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आईसीयू में कोरोना के छह मरीज भर्ती हैं। उनकी पूरी देखरेख स्टाफ से साथ करता हूं। दो महीने से अपने घर कोलकाता भी नहीं गया। 
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उन्होंने कहा कि मैं दिन में आठ घंटे आईसीयू में ही सेवा देता हूं और इसके बाद भी यदि जरूरत पड़ती है तो पूरी सेवा देने के लिए तत्पर रहता हूं। जब 20 दिनों पहले मां को फोन करके बताया था कि कोरोना के मरीजों के इलाज में ड्यूटी लगाई गई है, तो मां कुछ देर के लिए चिंतित हुईं, लेकिन फिर आशीर्वाद देते हुए कहा कि बेटा देश की सेवा करो। 

देश पहले है, परिवार बाद में। मां की इस बात से काफी हौसला मिला। डॉ. सायन कहते हैं कि अब समय की मांग है कि कोरोना को लेकर लोगों का हौसला बढ़ाया जाए। इससे ही आधी जंग जीत ली जाएगी।

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डॉ. आदर्श प्रताप

मुरादाबाद के रहने वाले डॉ. आदर्श दो महीने से अपने घर नहीं जा पाए हैं। 24 घंटे उनकी ड्यूटी आपातकालीन विभाग में लगाई गई है। यहां जो भी मरीज आता है उसकी कोरोना जांच कराने की जिम्मेदारी डॉ. आदर्श की है। वो कुछ समय के लिए भी अस्पताल से बाहर नहीं जा सकते हैं। 

मरीजों की सेवा में इस कदर लगे हुए हैं कि सोते और खाते भी अस्पताल में ही हैं। अब एक हफ्ते ड्यूटी करने के बाद 14 दिन के लिए वह क्वारंटीन में जाएंगे। डॉ. आदर्श इस महीने भी परिवार वालों से नहीं मिल पाएंगे। परिवार के लोग हमेशा चिंता में रहते हैं। 

डॉ. आदर्श फोन से घर पर बात करके माता-पिता को समझाते हैं कि संकट के इस समय में मैं अपना धर्म निभा रहा हूं। इसपर चिंता के साथ-साथ परिवार वाले भी उनका हौसला बढ़ाते हैं।
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