मुरादाबाद। दो सिपाहियोें की हत्या कर फरार हुए कमल की शनिवार को तारीख मुकर्रर थी। भले ही हत्या के एक मामले में अदालत में फैसले की तारीख पर सुनवाई न हो पाई पर इसी दिन कमल पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। जिस तारीख से बचने के लिए कमल ने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया, वह उस तारीख से पार नहीं पा सका और उसी दिन ढेर हो गया।
चर्चित इंजीनियर इकराम हत्याकांड में शनिवार को फैसला जाना था। इकराम की हत्या का आरोप कमल, धर्मपाल और शकील के सिर था। इसमें फैसले की तारीख पहले से ही 20 जुलाई मुकर्रर थी। इन तीनों को पूरी आशंका थी कि इस दिन उन्हें सजा हो जाएगी। इसके के चलते इससे पहले ही तीनों पेशी पर आते समय दो सिपाहियों की हत्या कर फरार हो गए। शनिवार को इस मामले की अदालत में सुनवाई नहीं हो पाई। तकदीर का लिखा कभी नहीं मिटता। ऐसा ही हुआ। अदालत से भले ही नहीं पर जैसे सजा की तारीख तो कमल के लिए पहले ही मुकर्रर हो चुकी थी। जिसे कोई टाल नहीं सका। चार दिन भागने के बाद भी शनिवार को ही कमल को मौत की सजा मिल गई। वह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। लोगों को जब पता चला किकमल मारा गया है तो लोगों की जुबां से एक ही शब्द निकला। इसकी सजा तो पहले ही मुकर्रर हो चुकी थी।