मुरादाबाद। कांग्रेस दफ्तर पर नगर निगम की ओर से नोटिस चस्पा किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को महापौर से मिलने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ता एकत्रित होकर दफ्तर पहुंचे और वहां चस्पा किए गए नोटिस को हटा दिया। इस मामले में भवन स्वामी ने कोतवाली में तहरीर दी है और कहा कि कांग्रेस नेताओं ने गैर कानूनी तरीके से फाड़ दिया है। भवन स्वामी की ओर से तहरीर में कहा गया कि उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत की थी कि उनका भवन जर्जर हो रहा है और कभी भी गिर सकता है। भवन के ऊपरी तल पर कांग्रेस अवैध तरीके से कार्यालय का संचालन कर रही है।
भवन को जर्जर घोषित करते हुए नगर निगम ने भवन पर नोटिस चस्पा किया तो कांग्रेस नेता असलम खुर्शीद व उनके साथियों ने यह कहकर नोटिस फाड़ दिया कि वह नोटिस को नहीं मानते। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से भवन स्वामी को धमकी भी दी गई। भवन स्वामी शशि रस्तोगी ने तहरीर में बताया कि कांग्रेस नेता अमीरुल हसन जाफरी ने नोटिस को फाड़ दिया है, जिसकी वीडियो भी उनके पास मौजूद है। वहीं, असलम खुर्शीद ने कहा कि वह पिछले दस दिनों से उत्तराखंड में हैं। वह तो घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। जिलाध्यक्ष विनोद गुंबर ने कहा कि 23 पार्षदों के साथ वह बृहस्पतिवार को महापौर से मिलने पहुंचे थे। महापौर ने खुद कहा कि इस नोटिस से निगम का कोई लेना देना नहीं है। भवन स्वामी संपत्ति को हड़पना चाहते हैं, जिसकी साजिश काफी समय से रची जा रही है। 200 साल पुराने पेड़ को काटने और भवन के नीचे खोदाई करना इस बात का सबूत है। कांग्रेस के किसी कार्यकर्ता ने नोटिस नहीं फाड़ा, यह जबरन आरोप लगाया जा रहा है।
- कांग्रेस दफ्तर पर नोटिस चस्पा होने की कहानी उलझी
नगर निगम की ओर से कांग्रेस दफ्तर को जर्जर घोषित कर लगाए जाने वाले नोटिस की गुत्थी उलझ गई है। बृहस्पतिवार को कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने 23 पार्षदों के साथ महापौर से वार्ता की थी। इसके बाद उन्होंने दावा किया था कि महापौर ने इस नोटिस को अमान्य करार दे दिया है। शुक्रवार को महापौर विनोद अग्रवाल ने इस बात को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि नोटिस को अमान्य नहीं किया गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर भवन पर को जर्जर घोषित कर नोटिस चस्पा किया गया है। ब्यूरो