बबराला के राजघाट गंगा घाट पर भैंस का मुंडन करता नाई।
- फोटो : CHANDAUSI
बबराला। गांव नंदरोली निवासी किसान की भैंस के बच्चे जीवित नहीं रहते थे। एक साधु की सलाह पर किसान ने राजघाट गंगा किनारे विधिवत रूप से भैंस और उसके बछड़े यानी बच्चे का मुंडन संस्कार करा दिया। 500 लोगों को दावत भी करा दी। यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। मुंडन संस्कार के बाद गांव में भैंस और उसके बच्चे को देखने वालों का तांता लगा रहा।
गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव नंदरोली निवासी नेम सिंह ने बताया कि उनकी भैंस का बच्चा जन्म के कुछ दिन बाद ही मर जाता था। काफी प्रयास के बाद एक भी बच्चा जीवित नहीं बचा। कुछ दिन पूर्व उसके घर साधू आए। अपनी व्यथा उन्होंने साधु से बताई तो साधु ने सुझाव दिया कि अबकी बार उसकी भैंस के जो भी बच्चा हो, उसका मुंडन गंगा घाट पर कराएं। इससे भैंस का बच्चा जीवित रह सकता है। नेम सिंह ने बताया कि उन्होंने तभी प्रण ले लिया था। अब उनके भैंस के बछड़ा हुआ तो उन्होंने निमंत्रण पत्र छपवा कर रिश्तेदारों और आसपास के गांव में बंटवा दिया। शुक्रवार को मुंडन संस्कार कराने के लिए भैंस और उसके बछड़े को लेकर राजघाट स्थित गंगा घाट पहुंच गए।
वहां गंगा स्नान कराने के बाद विधि विधान से भैंस व उसके बच्चे का मुंडन संस्कार कराया। सभी कार्य निपटने के बाद किसान ने अपने घर पर रिश्तेदार व परिचितों सहित 500 लोगों की दावत का भी आयोजन किया। इसमें सभी को भोजन कराया गया। किसान द्वारा भैंस व उसके बच्चे का मुंडन संस्कार कराने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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दावत के बाद भी लोगों का घर लगा है आना जाना
चंदौसी। राजघाट बबराला गंगा किनारे किसान नेम सिंह ने अपनी भैंस और बछड़े का मुंडन कराया। यह टोटका क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। दावत के बाद लोगों का नेम सिंह के आना जारी रहा। मुुंडन के बाद लोग भैंस और उसके बछड़े को देखकर जा रहे हैं।
बबराला में भैंस मुंडन संस्कार का छपा निमंत्रण कार्ड।- फोटो : CHANDAUSI