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टूट गई चीन की दीवार, मुरादाबाद कर सकता है तीन सौ करोड़ का कारोबार

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अमित मुद्गल, मुरादाबाद। पहली बार वर्चुअल प्लेटफार्म पर आयोजित हो रहा आईएचजीएफ दिल्ली फेयर लगातार उम्मीदों का आसमान छूता नजर कर रहा है। अहम यह है कि इस तरह के आयोजन में अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराने वाले चीन का वर्चस्व इस फेयर में टूट गया। चूंकि इस फेयर में उसे अपने उत्पादों को प्रदर्शन करने का अधिकार ही नहीं दिया गया है और केवल माल खरीदने की छूट दी गई है तो इसका सीधा फायदा भारत को मिलेगा। मेला आयोजक उम्मीद लगा रहे हैं कि केवल मुरादाबाद को ही तीन सौ करोड़ की डोज इस फेयर से मिल सकती है।
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13 जुलाई से यह फेयर शुरू हुआ जो 19 जुलाई तक चलेगा। निर्यातकों, बाइंग एजेंटों एवं बायर्स की मांग पर मेले को एक दिन बढ़ाया गया। पहले मेला 18 जुलाई को ही खत्म हो रहा था। दरअसल ईपीसीएच ने इसके लिए योजनाबद्घ तरीके से काम किया और महानिदेशक राकेश कुमार लगातार उद्यमियों के संपर्क में रहे। सरकार ने भी पूरी तरह से सपोर्ट किया। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे सराहा। इसका सार्थक परिणाम सामने आ रहा है। पहले सभी मेलों में चीन का दबदबा रहता था। निर्यातक भी वहां के ज्यादा होते थे तो बाइंग एजेंट एवं बायर्स भी। सबसे ज्यादा चीन ही ऐसे मेलों में कारोबार करता था चूंकि उसके निर्यातकों के स्टॉल बड़ी संख्या में लगते थे। इस बार के फेयर में ऐसा नहीं है। सीमा पर चीन की करतूत के बाद सख्त कदम उठाया गया और चीन के उद्यमियों को मेले में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने का अधिकार ही नहीं दिया गया। हां चीन के बायर्स शामिल हो सकते हैं। यानी वे खरीदारी कर सकते हैं। बिक्री नहीं। चीन के बिक्री न करने का लाभ भारत को होगा।
मुरादाबाद के 1000 निर्यातक
इस फेयर में कुल 1500 निर्यातक भाग ले रहे हैं जिसमें एक हजार मुरादाबाद के हैं। ऐसे में जाहिर है कि यहां ही सबसे ज्यादा लाभ होने जा रहा है। फेयर अध्यक्ष नीरज खन्ना कहते हैं कि इस फेयर में लगभग तीन सौ करोड़ रुपये के आर्डर केवल मुरादाबाद में ही आने का अनुमान है। वैसे तो यह फेयर कई हजार करोड़ के कारोबार की राह खोलेगा।
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फीडबैक शुरू
ईपीसीएच ने सभी निर्यातकों से इस मेले का फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। चूंकि मेले को पांच दिन हो गए हैं तो अब इसे फाइनल टच दिया जा रहा है। इस मेले का कुल कारोबार आगामी फेयर की रूपरेखा भी तैयार कराने में अहम भूमिका अदा करेगा।
ये देश ले रहे हैं मेले में भाग
इंडिया, आस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चाड, चिली, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, इक्वाडोर, मिस्र ,फिजी, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हांगकांग, आयरलैंड, इज़राइल, इटली, जापान, कुवैत, लेबनान, लिथुवानिया, लक्ज़मबर्ग, मारीशस, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड, न्यूकैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, नार्वे, ओमान, फिलीपींस, पुर्तगाल, पुअर्टोरिको, रूस, सउदी अरब, सर्बिया एंड मॉटेनेग्रो, सिंगापुर, दक्षिणी अफ्रीका, स्पेन, स्वीडन, स्विटज़रलैंड, ताइवान, थाईलैंड, तुर्की, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, यूके, अमरीका, उरुग्वे आदि।
- चीन को यह बड़ा झटका है कि इसमें उसे शामिल नहीं किया गया। इससे हमें बड़ा लाभ होने जा रहा है। मुरादाबाद को ही तीन सौ करोड़ की डोज मिलने की आस है- नीरज खन्ना, अध्यक्ष आईएचजीएफ फेयर
चीन इस मेले में अपने उत्पादों का प्रदर्शन नहीं कर सकता है। वहां के बायर्स खरीदारी कर सकते हैं। इसका फायदार निश्चित रूप से भारत और खास तौर पर मुरादाबाद को होगा- राकेश कुमार, महानिदेशक ईपीसीएच
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