बुजुर्ग चीफ हेड जेल वार्डन महिला बंदी से मोहब्बत के मामले में बख्श दिए गए हैं। पुलिस रिपोर्ट नहीं मिलने का हवाला देकर विभागीय जांच में भी उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है। दो माह पहले जेल के भीतर देहरादून की महिला बंदी और जेल के चीफ हेड वार्डन के बीच अफेयर का मामला सामने आया था। मामला खुलने के बाद कार्रवाई के तमाम दावे हुए थे।
लेकिन वक्त बीतने के साथ बाकी की तरह इस मामले की फाइल भी बगैर एक्शन बंद कर दी गई है। हालांकि चीफ हेड वार्डन की प्रेमिका को अब जमानत मिल चुकी है। वह जेल से बाहर है। चीफ हेड वार्डन भी कुछ दिनों में रिटायर होने वाले हैं। अफसर भी इस ओर से आंखें फेर चुके हैं।
जेल सुपरिंटेंडेंट डा. बीडी पांडेय कहते हैं कि मामला उजागर होने के बाद से ही आरोपी चीफ हेड वार्डन की महिला वार्ड से ड्यूटी हटा दी गई थी। उसके महिला वार्ड की तरफ जाने पर भी पाबंदी लगाई गई थी, जो अभी तक कायम है।
ये था मामला
देहरादून की एक महिला बंदी को करीब सालभर पहले धोखाधड़ी के मामले में अमरोहा पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा था। जेल में रहने के दौरान महिला बंदी का जेल के चीफ हेड वार्डन से अफेयर शुरू हो गया था। महिला वार्ड पर ड्यूटी के दौरान ये प्रधान बंदी रक्षक अपनी प्रेमिका महिला बंदी को खास सहूलियतें देता था। अपना मोबाइल फोन उसके पास छोड़ देता था। इसके अलावा भी वह उसकी तमाम तरह से मदद करता था।
बैरक में जेल कर्मी और महिला बंदी के बीच पनपे अफेयर की यह कहानी फरवरी के प्रथम सप्ताह में उस वक्त खुली थी जब महिला बंदी को कोर्ट में पेशी के लिए अमरोहा कचहरी ले जाया गया था। महिला अपने प्रेमी बंदी रक्षक का मोबाइल लेकर कोर्ट गई थी, अचानक कोर्ट रूम में उसके मोबाइल फोन की घंटी बज गई थी। तलाशी ली गई तो उसके पास से जेल के चीफ हेड वार्डन का मोबाइल फोन मिला था।
प्रेमी के खाते में डलवाए थे बीस लाख
महिला बंदी ने देहरादून में किसी व्यक्ति के खिलाफ रेप का मुकदमा लिखाया था। उस मुकदमे में समझौते के रूप में मिले 20 लाख रुपये भी महिला बंदी ने अपने प्रेमी बंदी रक्षक के खाते में डलवा दिए थे। इतनी बड़ी रकम के लेनदेन की बात उजागर होने के बाद जेल प्रशासन के भी कान खड़े हो गए थे। बंदी रक्षक ने महिला बंदी से वादा किया था कि जब वह जमानत पर छूट जाएगी तो वह उससे शादी कर लेगा। प्रधान बंदी रक्षक की पत्नी की मौत हो चुकी है।
हमें अमरोहा पुलिस की ओर से रिपोर्ट मिलने का इंतजार था। लेकिन पुलिस ने महिला बंदी से मिले मोबाइल की बाबत कोई रिपोर्ट जेल प्रशासन को भेजी ही नहीं। महिला बंदी द्वारा प्रधान बंदी रक्षक के खाते में मोटी रकम डलवाए जाने की बाबत भी पुलिस ने हमें अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी। घटनाक्रम जेल के बाहर महिला बंदी की कोर्ट पेशी के दौरान हुआ लिहाजा पुलिस रिपोर्ट के अभाव में प्रकरण में कोई विभागीय एक्शन नहीं लिया जा सका।
-बीआर वर्मा, सीनियर जेल सुपरिेंटेंडेंट।