मुरादाबाद में छठ महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शुक्रवार से चार दिन तक छठ पर्व के व्रत पूजा के तहत बिहार की लोक संस्कृति की रौनक छाएगी। रामगंगा विहार, बुद्धि विहार और लाइनपार क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से सूर्य भगवान की आराधना की जाएगी। इसके लिए घाट बनाए जा रहे हैं। वहीं बाजार में भी व्रत के सामान की दुकानें सज गई हैं।
17 नवंबर को नहाय खाय के साथ पर्व का शुभारंभ होगा। गंगाजल युक्त पानी से स्नान करके व्रत रखने वाली महिलाएं छठी मैया का पूजन करेंगी। इसमें नया अरवा चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी के साथ मूली फल का भोजन करेंगी। शाम को शुद्ध आटे की रोटी, चने की दाल मिलाकर लौकी की सब्जी का सेवन किया जाएगा और परिजनों को प्रसाद दिया जाएगा।
18 नवंबर को खरना किया जाएगा। इसमें महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं। शाम को शुद्ध आटे की रोटी, साठी के चावल गाय के दूध में खीर बनाकर, नए गुड़ के साथ अपने घर पर छठी मैया को नमन कर भोग लगाती हैं। इस समय से ही भोजन में नमक का प्रयोग बंद कर दिया जाता है। इस प्रसाद को पूरे परिवार को वितरित किया जाता है।
19 नवंबर को नहाने के बाद नए वस्त्र पहनकर शुद्ध आटे के ठेकुआ, नए गुड़ व चीनी के साथ देसी घी में खजूर बनाया जाता है। सभी प्रकार के फल, गन्ना का शाम के समय गंगाजल के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। महिलाएं नदी, तालाब में खड़ी होकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
निर्जल व्रत रखने वाली महिलाएं 20 नवंबर को सुबह उगते सूर्य को सभी प्रकार का फल, ठेकुआ, खजूर, गाय के दूध के साथ अर्घ्य देंगी। इसके बाद व्रत रखने वाली महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाकर कौंछ भरेंगी और आपस में गले मिलेंगी। बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लेंगी। इसके बाद प्रसाद का सेवन का व्रत पूर्ण करेंगी।