विधायक अब्दुल्ला आजम के दो-दो जन्मपत्र बनवाने के आरोप में दर्ज मुकदमे में पुलिस चार्जशीट तैयार कर ली है। इस मामले में पूर्व मंत्री आजम खां, उनकी पत्नी राज्यसभा सदस्य डॉ. तजीन फात्मा और विधायक अब्दुल्ला आजम आरोपी हैं।
इस मामले में गिरफ्तारी पर स्टे के लिए आजम खां हाईकोर्ट भी गए थे, जहां से स्टे मिल भी गया था। हालांकि पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि तीनों आरोपी जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए इनकी गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।
तीन जनवरी 2019 को भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना तीन जनवरी को भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने गंज थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि सपा विधायक और पूर्व मंत्री आजम खां तथा उनकी पत्नी तजीन फात्मा अपने बेटे विधायक अब्दुल्ला आजम खां के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए हैं।
पहला प्रमाणपत्र रामपुर नगरपालिका से जारी हुआ तो दूसरा लखनऊ नगर निगम से। तहरीर के आधार पर गंज थाने की पुलिस ने आजम खां, डॉ. तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम के खिलाफ आईपीसी की धारा 193, 420, 467, 468 और 471 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
इस बीच आजम खां इस मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। पुलिस ने अपनी विवेचना में कहा है कि हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर जो रोक लगाई है उसका स्थगन आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि तीनों आरोपी के जनप्रतिनिधि होने के कारण गिरफ्तारी किया जाना आवश्यक नहीं है। पुलिस ने चार्जशीट में से आईपीसी 193 की धारा को हटा लिया है।
पड़ोसी को धमकी देने के मामले में भी आजम पर चार्जशीट
पड़ोसी को धमकी देने के मामले में आजम खां सहित चार लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में भी गंज थाने की पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर ली है। यह मुकदमा आजम खां के पड़ोसी घेर मीरबाज खां निवासी आरिफ रजा खां की तहरीर पर दर्ज हुआ था।
इस मामले में आजम खां, उनके समर्थक फरहान खां, सलमान शम्सी, उजैर खां और कुछ अज्ञात के खिलाफ 147, 148, 149, 452, 323, 427, 504, 506, 120 बी और सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम 2008 की धारा-67 ए के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी।
हालांकि विवेचना में पुलिस ने 148, 149, 452, 427, 120-बी और 66 आईएक्ट की धारा को विलुप्त करते हुए चार्जशीट तैयार सीओ कार्यालय को भेज दी गई है। पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि आजम खां विधायक हैं अत: उनकी और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी से शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। लिहाजा उनकी गिरफ्तारी करना आवश्यक नहीं है।