मुरादाबाद। प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान बरती गई अनियमितता के मामले में जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में चल रही जांच में करीब 60 ग्राम पंचायतों का जिम्मा संभाले करीब 26 पंचायत सचिव को आरोप पत्र जारी किया गया है। इसके अलावा तत्कालीन डीपीआरओ राजेश कुमार (प्रशासक छजलैट) समेत जिले के लगभग सभी एडीओ पंचायत भी प्रशासन के रडार पर है। इन सबके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है।
प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान जिले की ग्राम पंचायतों में करीब 38 करोड़ रुपये विकास कार्य के नाम पर खर्च किए गए। इस दौरान न तो पंचायत एक्ट में दिए गए प्राविधानों का पालन किया गया और न ही टेंडर प्रक्रिया का। इस आशय की अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद डीपीआरओ, सीडीओ व डीएम के निर्देश पर जांच की गई तो यह कमियां उजागर होती गईं। मामला शासन स्तर तक पहुंचा तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम गठित कर मूंढापांडे और कुंदरकी विकास खंड क्षेत्र के बीस गांवों की जांच कराई गई। इधर डीपीआरओ द्वारा अपने स्तर से की गई जांच में भी भारी अनियमितता मिली। जिसके आधार पर डीपीआरओ ने संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर उनका स्पष्टीकरण तलब किया था। स्पष्टीकरण संतोष जनक न मिलने पर करीब 26 ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ गुरुवार को आरोप पत्र जारी कर दिया गया।
इसके अलावा सभी विकास खंडों के एडीओ भी प्रशासन के रडार पर आ गए हैं। जिसमें तत्कालीन डीपीआरओ राजेश कुमार भी शामिल हैं। डीपीआरओ के साथ-साथ उनके पास छजलैट विकास खंड के प्रशासक का भी कार्यभार था। सूत्र बताते हैं कि एडीओ पंचायत के रूप में प्रशासक रहे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शासन से की जानी है लिहाजा उनकी भी पत्रावली तैयार कर ली गई है। जिसे जल्द ही शासन को भेज दिया जाएगा।
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