फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Moradabad News: दाखिले के बाद भी चुनाैतियां, बच्चों के साथ हो रहा भेदभाव

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को आरटीई के जरिये प्रवेश मिलने के बाद भी उनकी चुनाैतियां कम नहीं होती हैं। ऐसे कई मामले सामने आए है, जब निजी स्कूलों में बच्चों के साथ भेदभाव हुआ। कक्षा हीं नहीं आरटीई से प्रवेश पाने वाले बच्चों के स्कूल भी बदल दिए गए। हालांकि, बच्चों के भविष्य के लिए अभिभावक भी कहीं शिकायत नहीं करते हैं।
विज्ञापन

एक अभिभावक ने बताया कि उनके बच्चे का आरटीई से नर्सरी में दाखिला हुआ था। कक्षा में 20 बच्चे थे। अब एलकेजी में 12 बच्चे हैं। सत्र की शुरुआत में उन्हें उसी स्कूल के नाम से दूसरी जगह स्कूल शुरू करने के बारे में बताया गया। वहां करीब तीन महीने तक बच्चों की कक्षाएं चलीं। बाद में प्रधानाचार्य ने अभिभावक से कहा कि आपके बच्चे का दाखिला इसी क्षेत्र के नाम से हुआ है, इसलिए मुख्य स्कूल में ही कक्षा लगेगी।
वहीं शिक्षा विभाग के कर्मचारी ने बताया कि एक अभिभावक ने जानकारी दी थी कि सिविल लाइंस के एक स्कूल में उनके बच्चे का आरटीई से दाखिला हुआ है। वह जिस कमरे में बैठता है, उसमें आरटीई से प्रवेश पाने वाले अन्य कक्षाओं के भी बच्चे बैठते हैं। कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ ही पढ़ाया जाता है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए भी सिर्फ एक शिक्षक की ही ड्यूटी रहती है। इससे ढंग से पढ़ाई नहीं हो पाती। कर्मचारी के अनुसार जब अभिभावक से स्कूल की लिखित शिकायत करने को कहा तो उन्होंने बच्चों के भविष्य की बात कहते हुए लिखित शिकायत करने से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन



हमारे पास किसी भी अभिभावक ने बच्चे के साथ सौतेला व्यवहार होने की शिकायत नहीं की है। यदि शिकायत आएगी तो उसके आधार पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - विमलेश कुमार, बीएसए

बच्चों पर पड़ता है गलत असर
स्कूल में बच्चों के साथ भेदभाव करने से उन पर गलत असर पड़ता है। इसके लिए शिक्षकों को सतर्क रहने की जरूरत है। स्कूल का अर्थ ही समान शिक्षा और समान व्यवहार करना है। यदि कहीं भेदभाव हो तो बच्चे घर में बताएं और अभिभावक बिना डरे इसकी शिकायत पहले प्रधानाचार्य और बाद में जिम्मेदार अधिकारी से करें। बच्चों के साथ लंबे समय तक भेदभाव होता रहे तो वह मानसिक रूप से बीमार हो सकते हैं। साथ ही उनका व्यवहार भी बदल सकता है। - डॉ. नीरज गुप्ता, मनोरोग विशेषज्ञ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें