मुरादाबाद। कांठ क्षेत्र में दो साल पहले साथ जाने से इन्कार करने पर महिला की जिंदा जलाकर हत्या करने के दोषी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। घटना में दोषी भी झुलस गया था।
कांठ क्षेत्र के महमूदपुर माफी निवासी जतिन कुमार ने 26 अगस्त 2022 को मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि वह किसी काम से बाहर गया था और बच्चे स्कूल गए थे। घर में जतिन की पत्नी गीता अकेली थीं। दोपहर करीब एक बजे पड़ोस में रहने वाला अजीत घर में घुस आया और उसने गीता पर साथ चलने के लिए दबाव बनाया।
महिला ने इसका विरोध किया तो अजीत ने उसके ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। इस दाैरान आरोपी खुद भी झुलस गया। सूचना पर पुलिस ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई थी लेकिन आरोपी ठीक हो गया। पुलिस ने मुकदमे में हत्या की धारा में बढ़ाकर आरोपी अजीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या दस योगेंद्र चौहान की अदालत में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार कश्यप ने बताया कि इस मामले 12 गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए, जिन्होंने घटना की पुष्टि की। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आरोपी अजीत को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जुर्माना भी लगाया।
महिला को लंबे समय परेशान कर रहा था आरोपी
गीता के पति जतिन कुमार ने अपने बयानों में अदालत को बताया कि अजीत कई बार उसकी पत्नी को रास्ते में रोककर परेशान कर चुका था। वह उस पर दबाव बनाता था कि वह अपने पति को छोड़कर उसके साथ चले। महिला इसका विरोध कर रही थी। आरोपी के परिवार के लोगों से इस बात की शिकायत की तो अजीत रंजिश रखने लगा। बाद में माैका पाकर गीता को जिंदा जला दिया। गीता दो पुत्रों की मां थी। घटना के समय एक बेटे की आयु 10 साल और दूसरे की आठ साल थी। जब वारदात हुई तो दोनों बच्चे स्कूल गए थे।
अदालत ने माना जघन्य अपराध
अदालत ने अपने निष्कर्ष में कहा कि आरोपी अजीत की मानसिकता महिला के प्रति सही नहीं थी। उसने अपनी इच्छापूर्ति के लिए इस प्रकार के अपराध को अंजाम दिया, जो जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। आरोपी ने अपने बयान में बताया कि उसे गीता के सुसराल वालों ने जलाया था लेकिन वह अपने इस बयान की पुष्टि नहीं कर पाया। वहीं अभियोजन पक्ष द्वारा संपूर्ण घटना को अपने बयानों से स्पष्ट किया गया। इसके आधार पर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा देना ठीक है।