जिला अस्पताल परिसर में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेट्री (सेंट्रल लैब) तैयार हो गई है। इसी सप्ताह इसका उद्घाटन होने के आसार हैं। अब मरीजों को पैथोलॉजी में होने वाली विभिन्न जांचों के लिए सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक लाइन नहीं लगानी पड़ेगी। यहां 24 घंटे जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। लैब के संचालन के लिए पैथोलॉजिस्ट व सहायक स्टाफ की तैनाती कर दी गई है।
जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में कई जांचें अलग-अलग होती हैं। अब सेंट्रल लैब तैयार होने से सभी जांचें एक छत के नीचे हो सकेंगी। कोविड के दौरान बनाई गई ट्रू नेट लैब की ऊपरी मंजिल पर सेंट्रल लैब तैयार की गई है। 80 लाख रुपये इसके निर्माण में लगे हैं। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल की ओपीडी में 1500 से ज्यादा मरीज रोजाना आते हैं।
250 से 300 मरीजों को डॉक्टर जांच के लिए पर्चे पर लिखते हैं। पैथोलॉजी में भीड़ होने व दोपहर डेढ़ बजे तक सैंपल लिए जाने के कारण रोजाना 50 से ज्यादा मरीज जांच से छूट जाते हैं। सेंट्रल लैब शुरू होने के बाद मरीज किसी भी समय आकर जांच करा सकेंगे। कैंसर, थैलेसीमिया समेत सभी बीमारियों की निशुल्क स्क्रीनिंग का लाभ लोगों को मिलेगा।
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लाइसेंस के इंतजार में अटकी एफेरेसिस यूनिट
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एफेरेसिस यूनिट शुरू करने की तैयारी है, जिससे डेंगू के सीजन में मरीजों को जंबो पैक के लिए भटकना न पड़े। प्लेटलेट्स कम रह जाने पर मरीजों को जंबो पैक चढ़ाना पड़ता है। निजी अस्पतालों में भी किट की किल्लत और पहले से बुकिंग होने के कारण लोग परेशान होते हैं। इस परिस्थिति से निपटने के लिए सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में जंबो पैक बनाने की मशीन लगाई गई है लेकिन लाइसेंस न मिलने के कारण इसका उद्घाटन रुका हुआ है। जंबो पैक बनाने वाली किट एनएचएम के बजट से खरीदी जाएंगी। बाजार में एक किट की कीमत 8250 रुपये है।
सेंट्रल लैब तैयार हो चुकी है। इसी सप्ताह उद्घाटन कराने की तैयारी है। निदेशालय से अनुमति मांगी गई है। वहां से जैसे निर्देश होंगे, उनके अनुसार लैब की शुरुआत करा दी जाएगी।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक