नैनी दून एक्सप्रेस मामले में आरपीएफ के अधिकारियों ने मंगलवार देर रात मेवा नवादा में मौका मुआयना किया। घटनास्थल से कुछ साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। फिलहाल रेलवे संपत्ति व यात्रियों को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए कार्य के आरोप में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
आरपीएफ के अलावा रेल प्रशासन भी मामले की जांच कर रहा है। इंजीनियरिंग विभाग, परिचालन विभाग आदि के उच्च अधिकारी इस मामले की पड़ताल में लगे हैं। ज्ञात हो कि मंगलवार शाम 7:30 बजे स्योहारा के पास मेवा नवादा में रेलवे ट्रैक पर बड़ा पत्थर रखा होने से देहरादून से काठगोदाम जा रही (12091) नैनी दून एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने से बची थी। पत्थर के कारण कुछ देर तक ट्रेन ट्रैक पर घिसटती हुई चली थी। ड्राइवर की समझदारी से हादसा होने से बच गया था। इस मामले में नैनी दून एक्सप्रेस के ड्राइवर, सहायक ड्राइवर व गार्ड के बयान दर्ज किए गए हैं। डीआरएम राजकुमार सिंह का कहना है कि घटनास्थल के पास कोई ऐसा साक्षी नहीं मिला है जिससे यह स्पष्ट हो सके की पत्थर जानबूझकर वहां रखा गया था। हालांकि यह प्रश्न अभी बरकरार है कि ट्रैक पर पत्थर आया कहां से। फिलहाल रेलवे व आरपीएफ की टीम हर बिंदु पर तहकीकात कर रही है। घटनास्थल के आसपास आम नागरिकों का आवागमन न होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। डीआरएम ने बताया कि घटना में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा था। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसकी रिपोर्ट साझा की जाएगी।
1995-96 में भी मुरादाबाद-सहारनपुर लाइन पर हुई थी दुर्घटना
विभागीय जानकारों का कहना है कि वर्ष 1995-96 में भी मुरादाबाद सहारनपुर रेल खंड पर एक ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। यह भी स्योहारा के आसपास का ही मामला था। इसके अलावा एक घटना में ट्रेन की पटरियों से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। इसमें रेलवे व सिविल पुलिस ने मिलकर जांच की थी और सिविल पुलिस में मुकदमा भी दर्ज किया गया था। कुछ लोगों द्वारा ट्रेन की पटरी काटने की यह पुरानी घटना वर्तमान में रेल अधिकारियों के संज्ञान में नहीं है।