पैसेंजर गाड़ियों के कैंसिलेशन से आम आदमी को दिक्कत लगातार बढ़ रही है। 21 जोड़ी गाड़ियों के कैंसिलेशन से पूरे मंडल के सभी छोटे स्टेशन से चढ़ने वाले यात्री प्रभावित हो रहे हैं। इसको लेकर गुस्सा भी बढ़ने लगा है। सबसे बड़ी खास बात कि ये फैसला बड़ौदा हाउस से लिया गया है और इसमें मंत्रालय शामिल नहीं है। अधिकारियों का मानना है एक या दो दिन में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।
मुरादाबाद मंडल में चलने वाली 21 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों को कैंसिल कर दिया गया है। इनमें से चार जोड़ी गाड़ियां तीस जुलाई से बंद हो जाएंगी। इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों के कैंसिलेशन से लाखों लोगे प्रभावित हो रहे हैं। पैसेंजर ट्रेनों के कैंसिलेशन का फैसला उत्तर रेलवे मुख्यालय ने ड्राइवरों की कमी के चलते लिया है। उत्तर रेलवे मुख्यालय से लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार इसमें मंत्रालय का शामिल नहीं किया गया है।
यह भी तय है कि इसके परिणाम जल्द सामने आने लगेंगे जब इस मुद्दे पर हंगामा शुरू होगा। शुक्रवार को भी स्टेशनों पर स्टेशन मास्टरों से भी यात्रियों की बहस हुई। रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी उनका जवाब देते रहे। इसकी जानकारी मंडलीय अधिकारियों को भी है, लेकिन अभी वे कुछ कहने से बच रहे हैं। साथ ही मान रहे हैं कि यह फैसला किसी भी स्तर से ठीक नहीं है। हालांकि उनका कहना है कि ठंड के दिनों में कोहरे के कारण इससे ज्यादा गाड़ियां कैंसिल होती हैं। लेकिन एक साथ भी इतनी पैसेंजर कभी रद्द नहीं हुई।
रेल राज्य मंत्री की चलाई डेमू चार महीने भी यात्रियों को सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकी। एडीआरएम संजीव मिश्रा ने कहा कि ट्रेनों का संचालन बंद करना मजबूरी है। अभी इस पर मंत्रालय से कोई निर्देश नहीं है।