मुरादाबाद। पीतलनगरी के हस्तशिल्प उत्पादों में विदेशी खरीदारों की दिलचस्पी बरकरार है। ग्रेटर नोएडा में चल रहे आईएचजीएफ दिल्ली फेयर में बृहस्पतिवार को अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, रूस और जापान समेत कई देशों के खरीदार पहुंचे। उन्होंने मुरादाबाद के फर्नीचर, धातु की सजावटी वस्तुओं और घरेलू सजावट के उत्पादों के बारे में जानकारी ली। पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद भी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। इससे जिले के निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल रहा है।
13 से 17 अक्तूबर तक आयोजित दिल्ली फेयर में मुरादाबाद के हस्तशिल्प की विभिन्न श्रेणियों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। बदलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की मांग को देखते हुए निर्यातक भी नए प्रयोग कर रहे हैं। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने बताया कि फेयर के शुरुआती तीन दिनों में नए खरीदारों ने निर्यातकों के साथ कारोबार करने में रुचि दिखाई है। खरीदार पुराने और नए उत्पादों के बारे में जानकारी ले रहे हैं। ईपीसीएच के मुख्य संरक्षक और इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और जापान समेत कई देशों के खरीदार फेयर में आए हैं। उनकी रुचि घरेलू सजावट, फर्नीचर, कपड़े, फैशन से जुड़ी वस्तुओं और जीवनशैली के उत्पादों में है।
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पीतलनगरी के उत्पादों की मांग बरकरार
फेयर में पहुंचे विदेशी खरीदार भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के साथ अपने कारोबार का विस्तार करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। ब्रिटेन के खरीदार इयान ने मुरादाबाद के स्नो फर्नीचर और ब्लॉक प्रिंट वाले उत्पादों के बारे में पूछताछ की। जर्मनी के खरीदार जुर्गन राइटर ने बताया कि फेयर से उनके कारोबार में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है। फ्रांस की खरीदार सिल्वियान शैट्री फर्नीचर की तलाश में मेले में पहुंचीं और उन्होंने मुरादाबाद के कुछ फर्नीचर पसंद किए। रूस से आईं इरीना एलिसेवा घरेलू सजावट के सामान, रोशनी के उपकरणों और धातु के उत्पादों की तलाश कर रही हैं।
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निर्यातकों को नई तकनीक और नियमों की जानकारी
-फेयर में उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कारोबार में हो रहे बदलावों की जानकारी भी दी जा रही है। फेयर अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल का कहना है कि बृहस्पतिवार को कृत्रिम मेधा (एआई), डिजिटल माध्यमों पर उत्पादों की पहुंच बढ़ाने, यूरोपीय संघ के वनों की कटाई संबंधी नियमों और आपूर्ति शृंखला में उत्पादों की जानकारी दर्ज रखने जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। यूरोपीय संघ की पैकेजिंग संबंधी आवश्यकताओं के बारे में भी निर्यातकों को जानकारी दी गई, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार के नियमों के अनुरूप कारोबार कर सकें।