शहर से सटे मोरा की मिलक गांव निवासी असलम(35) ने मौत के खौफ में रामगंगा नदी में कूद कर आत्महत्या कर ली। असलम ब्रेन ट्यूमर की बीमारी से ग्रस्त था। उसने डाक्टर ने बताया था कि वह पांच माह ही जी पाएगा। डाक्टर की जुबां से निकले ये बोल असलम के दिल में जगह कर गए।
वह तनाव में आ गया और बुधवार को वह चट्टा पुल के पास नदी में कूद गया था। तीन दिन बाद करीब पंद्रह किलोमीटर दूर कटघर क्षेत्र में देवापुर के पास उसकी लाश रामगंगा नदी में पड़ी मिली। असलम के छोटे भाई अकरम ने बताया कि तीन साल पहले अकरम को दौरा पड़ा था।
उसकी जुबान बंद हो गई थी और एक हाथ ने काम करना बंद कर दिया था। तब उसे कॉसमॉस अस्पताल में दिखाया गया । यहां के न्यूरो सर्जन ने उसके ब्रेन की सर्जरी की थी। इसके बाद उसका इलाज चलता रहा। बाद में डाक्टरों ने उसे दिल्ली के मैक्स अस्पताल में रेडियो थेरेपी के लिए रेफर कर दिया। यहां से इलाज के बाद असलम ठीक होने लगा था।
लेकिन पिछले 6 महीने से उसे फिर से दौरे पड़ने शुरू हो गये थे। एक सप्ताह पहले ही उसके परिजन उसे फिर से दिल्ली ले गए थे। डाक्टरों ने फिर से सर्जरी करने की बात कही। कहा कि जिस डाक्टर ने पहले सर्जरी की थी उन्हीं से सर्जरी कराएं। परिजन असलम को फिर से कॉसमॉस अस्पताल ले गये।
यहां डाक्टर ने रिपोर्ट देखकर कहा कि असलम को चौथे स्टेज का ट्यूमर वाला कैंसर है। इसके बचने की बहुत कम संभावना है। डाक्टर ने असलम से कहा कि वह पांच से छह महीने तक ही बच पायेगा। इसके बाद से असलम गुमसुम रहने लगा और तीन दिन पहले घर से गायब हो गया।