ईवीएम आज सुनाएंगी फैसला, कौन बनेगा बिलारी का विधायक
बस कुछ और घंटों की बात है। ये साफ हो जाएगा कि फहीम अपने पिता की सीट बचा पाते हैं या फिर भाजपा को बिलारी विधानसभा सीट पर खाता खोलने में कामयाबी मिलती है। प्रचार से लेकर वोटिंग तक दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही है। चुनाव का नतीजा दोनों दलों के कई दिग्गज नेताओं की वोटरों के बीच हैसियत को बेनकाब करेगा। सपा सीट बचाने के लिए जूझ रही थी तो भाजपा इस सीट को जीतकर 2017 का रूझान सैंपल बनाना चाहती थी।
लिहाजा नतीजों पर प्रत्याशियों के साथ ही दोनों दलों के बड़े नेताओं की भी नजरें टिकी हैं। बिलारी से सपा के विधायक रहे हाजी मोहम्मद इरफान की 10 मार्च को बदायूं में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। हादसे वक्त वह कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के बेटे के विवाह समारोह में हिस्सा लेने जा रहे थे। हाजी इरफान की मौत के बाद बिलारी विधानसभा सीट रिक्त हो गई थी। जिस पर 16 मई को उपचुनाव में वोटिंग हुई थी।
चुनाव में भाजपा की ओर से सुरेश सैनी मैदान में थे जबकि सपा ने मरहूम विधायक के बेटे मोहम्मद फहीम को मैदान में उतारा था। दोनों के बीच कांटे का मुकाबला हुआ था।
प्रत्याशियों के साथ ही दोनों दलों के कुछ बड़े नेताओं के बीच भी इस चुनाव में शक्ति परीक्षण हुआ है। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान तीन दिन तक बिलारी क्षेत्र में कैंप किए रहे तो सपा की ओर से मोहम्मद आजम खां ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। गुरुवार को सुबह दस बजे तक स्थिति साफ हो जाएगी कि फहीम अपने पिता की सीट बचा पाते हैं या फिर भाजपा नवसृजित बिलारी विधानसभा सीट पर अपना खाता खोल पाती है।