मनुष्य स्वयं को भगवान बनाने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करें, क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड़ कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौड़े चले आते हैं। महाराज ने कथा में बताया कि सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा की आवभगत में इतने विभोर हो गए कि द्वारका के नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रों के साथ सुदामा का हालचाल पूछने लगे।
पाकबड़ा। मनुष्य स्वयं को भगवान बनाने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करें, क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड़ कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौड़े चले आते हैं। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ।
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श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ के समापन के अवसर पर व्यास पीठ से श्याम गोविंद दास महाराज ने श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का वर्णन, श्रीमद्भागवत तथा श्रीव्यास पूजन किया। महाराज ने कथा में बताया कि सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। पानी परात को हाथ छूवो नाहीं, नैनन के जल से पग धोये। श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा की आवभगत में इतने विभोर हो गए कि द्वारका के नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रों के साथ सुदामा का हालचाल पूछने लगे। उन्होंने बताया कि इस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्रता में कभी धन दौलत आड़े नहीं आती। इस मौके पर विशाल रूहेला, काकू भटनागर, राजीव भटनागर, हिमांशु भटनागर, भूपकिशोर शर्मा, आदर्श गुप्ता, शैवी शर्मा, आकाश रूहेला, बुलाकी सैनी, दिनेश रूहेला, धर्मेंद्र रूहेला, जितेन्द्र सिंह, जबर सिंह, कुलदीप सिंह, आदि लोग मौजूद थे।