रेलवे के किनारे अभी तक दूर दूर तक खेत खलिहान या फिर गांव दिखाई देते हैं। कुछ दूर पेड़ तो फिर मैदान ऐसा ही कुछ नजारे होते हैं। लेकिन आने वालों सालों में रेलवे किनारे इन नजारों को बदलने की तैयारी की गई। रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर पौधारोपण किया जाएगा। इसमें पेड़ों का चयन रंग के अनुसार होगा। इसे कलर स्कीम का नाम दिया गया है। आने वाले तीन से चार साल में बाद जब यात्री ट्रेन की खिड़की से झांकेंगे तो उन्हें रेलवे की पटरियों के किनारे खूबसूरत नजारे दिखाई देंगे।
रेलवे ने वन विभाग के साथ खाली पड़ी जमीन पर पौधारोपण के लिए समझौता किया है। इसके तहत रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर पौधारोपण कराया जाएगा। जिसे खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग भी होगा और पर्यावरण संतुलन में मदद भी मिलेगी। रेलवे के पास पटरी के किनारे लाखों हेक्टेयर जमीन है। जिस पर वन विभाग पौधे लगाकर हरियाली लाएगा। हालांकि रेलवे ने भी पहले उस जमीन पर पेड़ लगाए हुए हैं। नए पौधारोपण के लिए रेलवे ने कुछ शर्त भी लगाई है। इन शर्तों के आधार पर रेलवे और वन विभाग के बीच समझौता हुआ है।
रेलवे अपनी जमीन देगा और वन विभाग पौधे लगाएगा। लेकिन पेड़ ऐसे लगाए जाएंगे जिनकी ऊंचाई 15 से बीस फीट के बीच रहे। वे पौधे ऐसे होंगे जिनके ट्रैक पर गिरने से रूट बाधित होने का खतरा भी न हो। इसके लिए कलर स्कीम के तहत पौधे लगाए जाएंगे। जिसमें फूल वाले पौधों के साथ ही झाड़ वाले पौधे भी शामिल होंगे। समझौते के लिए एक मीटिंग बाकी है। इसमें लगाए गए पेड़ की लकड़ी पर शर्त तय होनी है। जुलाई से पौधारोपण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।