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सीलिंग भूमि घोटाला : पूर्व अफसरों ने ‘बेच’ डाली 68000 वर्ग मीटर भूमि, सहायक अभियंता निलंबित

Fri, 29 Jun 2018 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
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घोटाला - फोटो : amar ujala
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करीब 200 करोड़ रुपये के अर्बन सीलिंग भूमि घोटाले में शासन ने अर्बन सीलिंग विभाग के सहायक अभियंता एसपी गुप्ता को निलंबित कर दिया है। घोटाले में पूर्व डीएम और एक सेवानिवृत्त लेखपाल का भी नाम शामिल है। तहसील के लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक की भूमिका जांच में दागदार निकली है। इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करके एमडीए के कब्जे वाली करीब 68000 वर्ग मीटर भूमि कथित किसानों के पक्ष में छोड़ दी थी।

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प्राधिकरण इस भूमि पर सड़कें और पार्क बनाकर योजनाएं विकसित कर चुका था। अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के बीच में पूर्व डीएम और एडीएम सिटी ने एक-एक करके सीलिंग भूमि किसानों के पक्ष में छोड़ने के 15 आदेश किए। इनमें से ज्यादातर आदेश तत्कालीन एडीएम सिटी ने किए थे। एक फाइल पर खुद पूर्व डीएम के आदेश थे।
 

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एमडीए अधिकारियों का आरोप था कि प्रशासन ने उन्हें पक्ष रखने के लिए नोटिस तक नहीं दिया था। तत्कालीन मंडलायुक्त एल. वेंकटेश्वर लू के आदेश पर हुई जांच में सीलिंग भूमि छोड़ने के सभी आदेश अवैध पाए गए थे। कमिश्नर ने सभी आदेशों को निरस्त करने और इसे आपराधिक षडयंत्र मानकर इसमें शामिल अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।

शुरू में इस घोटाले को दबाने की कोशिशें हुईं। दो-दो मंडलायुक्तों के आदेश के बावजूद आरोपियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। हालांकि पूर्व डीएम और एडीएम के सभी आदेश निरस्त कर दिए गए थे। इसके खिलाफ भी कुछ लोग हाईकोर्ट पहुंच गए थे। मंडलायुक्त राजेश कुमार सिंह की सख्ती के बाद घोटाले में कार्रवाई शुरू हुई है।

एडीएम सिटी जगतपाल सिंह ने फिर से सुनवाई करके पूर्व अफसरों के सभी 15 आदेश रद्द कर दिए हैं। एक सप्ताह पहले एक बाबू और स्टेनो को आरोप पत्र दिए गए हैं। एडीएम ने फाइलों पर रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। एडीएम ने बताया कि अर्बन सीलिंग विभाग के एई सुनील गुप्ता को भी शासन ने निलंबित कर दिया है।


 

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बड़े अफसरों पर अभी तक नहीं हुई कार्रवाई

मंडलायुक्त राजेश कुमार सिंह की सख्ती के बाद सीलिंग भूमि घोटाले में कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। लेकिन इसके बावजूद करोड़ों रुपये के इस घोटाले में जिला प्रशासन प्राथमिकी दर्ज कराने के मूड में नहीं है। इसका सीधा लाभ घोटाले में शामिल बड़े अफसरों को मिल रहा है। रिपोर्ट दर्ज नहीं कराने के पीछे आईएएस लॉबी का दबाव भी माना जा रहा है। एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी का कहना है यदि यही घोटाला पीसीएस अधिकारी तक सिमटा होता तो अभी तक मुकदमा दर्ज होकर कार्रवाई हो चुकी होती।

किसानों की आड़ में प्रापर्टी डीलरों का ‘खेल’

सीलिंग भूमि घोटाले का पूरा खेल कुछ प्रापर्टी डीलरों से मिलकर खेला। सीलिंग में जा चुकी किसानों की भूमि के कागजात तैयार कराकर इन किसानों को छोटी - मोटी रकम देकर उनसे अनुबंध करा लिए गए। इसके बाद किसानों का नाम आगे करके प्रापर्टी डीलरों ने अधिकारियों की मदद से करोड़ों रुपये की सीलिंग भूमि हथिया ली थी। कुछ मामलों में बाद में किसानों से प्रापर्टी डीलरों ने बैनामा भी करा लिया था। सीलिंग भूमि घोटाले की भूमि खरीदने वालों में शहर के कुछ चिकित्सक भी शामिल हैं।

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