आईएफटीएम विश्वविद्यालय में शनिवार को दीक्षांत समारोह का रंगारंग आयोजन हुआ। बैंड की मधुर ध्वनि के साथ शैक्षिक शोभायात्रा निकाली गई। मुख्य अतिथि एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डीएस चौहान, कुलाधिपति राजीव कोठीवाल ने विद्यार्थियों को अखंडता की शपथ दिलाई और दीक्षांत समारोह के शुभारंभ की घोषणा की।
कुलपति डॉ. आरएम दूबे ने विश्वविद्यालय के शैक्षिक कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान 62 मेधावियों को स्वर्ण पदक सहित 3658 डिग्रियां प्रदान की गईं। 22 मेधावियों को पीएचडी की उपाधि से अलंकृत किया।
प्रो. डीएस चौहान ने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से रूबरू होना चाहिए, चाहे वह कहीं भी क्यों न विकसित हो रही हो। इस बारे में जाति, समाज, राज्य, क्षेत्र या धर्म से संबंधित किसी तरह की हीन भावना को पनपने का अवसर न दें। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों का भ्रमण करके वहां हुए अनुसंधान और विकास के बारे में अनुभव प्राप्त करें।
इंटरनेट के माध्यम से जानकारियां जुटाएं। भारतीय अनुसंधान बेहद प्रभावकारी रहे हैं। भारतीय पत्रिकाओं में इसे जगह मिलनी चाहिए। इससे भारत के खाते में दर्ज पेटेंट की संख्या में बढ़ोतरी और औद्योगिक उपक्रमों में इसका असर दिखेगा। नालंदा, तक्षशिला, वल्लभी विश्वविद्यालय पूरे विश्व में विख्यात थे। अज्ञानता के कारण प्राचीन ज्ञान नष्ट हो रहा है।
हमें मां और मातृभूमि के प्रति अपने उत्कृष्ट मूल्यों को फिर से जीवंत करना होगा। इस दौरान प्रतिकुलाधिपति शंकर सरन कोठीवाल, मंजू कोठीवाल, अभिनव कोठीवाल, अमित कोठीवाल, दीपक कोठीवाल, सुनील कोठीवाल, प्रतिकुलपति डॉ. मोहित दूबे, राजीव भाटिया, प्रो. एसएच अंसारी, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार, जीपी उपाध्याय, मनीष मेहता आदि मौजूद रहे।