रामपुर सांसद आजम खान के मौलाना जौहर अली विश्वविद्यालय में छापा मारने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है और जिले के डीएम और एसएसपी को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय में पड़े छापे के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए। मालूम हो कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की तरफ से दायर की गई इस याचिका में सर्च वारंट के बिना छापा मारने को लेकर शिकायत की गई थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सफदर काजमी का कहना है कि विश्वविद्यालय में पुलिस ने बिना अधिकार के छापा मारा और चोरी की किताबें बरामद करने का दावा किया है। अधिवक्ता ने कहा कि चांस्लर आजम खान से राजनितिक वैमनस्यता के कारण यह कार्रवाई की जा रही है।
वहीं राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस ने चोरी की एफआईआर की विवेचना के तहत मजिस्ट्रेट के साथ छापा मारा और चोरी का सामान भी बरामद किया है। सारी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
कोर्ट ने सरकार व पुलिस को कानून के तहत ही काम करने की नसीहत दी है। अपर महाधिवक्ता ने कहा कि विवेचनाधिकारी को बिना सर्च वारंट के परिसर की तलाशी लेने का अधिकार है। मजिस्ट्रेट की अनुमति से कार्रवाई की गई है।