मुरादाबाद। तीन साल चार महीने बतौर प्रदेश अध्यक्ष सूबे को सांगठनिक रूप से मथ चुके चौधरी भूपेंद्र सिंह अब फिर यूपी कैबिनेट का हिस्सा बन गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने से पूर्व वह योगी सरकार के पहले कार्यकाल में पांच साल तो दूसरे कार्यकाल में पांच महीने मंत्री रह चुके हैं। यह जिम्मेदारी उन्हें जमीनी स्तर की भाजपाई राजनीति से लेकर प्रदेश की सियासत तक के सफर के तजुर्बे के दम पर मिला है तो किसान और गन्ना प्रभावित पश्चिमी यूपी में भाजपा का आधार मजबूत करने खासकर जाटों को साधने के इनाम रूप में मिला है। देखना दिलचस्प होगा कि यूपी सरकार में एक और पारी के दौरान वह कौन सी रणनीति अपनाते हैं, जो अगले साल के विधानसभा चुनाव में सरकार और संगठन के मंसूबों को पूरा करने में सहायक बन सके।
मुरादाबाद की कांठ तहसील के गांव मेहंद्री सिकंदरपुर में जन्मे भूपेंद्र सिंह को खेती, जमीन और ग्रामीण पृष्ठभूमि के अनुभव विरासत में मिले हैं। मुरादाबाद में गुजरे छात्र जीवन से सियासत का रुख करने वाले भूपेंद्र वर्ष 1989 में भाजपा से जुड़े तो फिर कभी इधर-उधर नहीं देखा। उस दौर से लेकर बाद के वर्षों तक लंबे समय भाजपा का शुमार विपक्षी दलों तक ही सीमित रहा। सत्ता से दूरी की भाजपा की इस अवधि में उन्होंने न सिर्फ पार्टी से जुड़ाव बनाए रखा बल्कि संगठन से मिली जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया। यही वजह रही कि संगठन में समय के साथ उनकी पदोन्नति होती गई और सांगठनिक दृष्टि से प्रदेश अध्यक्ष तक जैसी जिम्मेदारी के लिए भी पार्टी ने उन्हें भरोसेमंद माना।
वह करीब 40 महीने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस दौरान पूरे सूबे में भाजपा के सांगठनिक दृष्टिकोण से मुरादाबाद मंडल की तूती बोली तो पूर्व में उनके दो बार मंत्री रहने, पंचायतीराज मंत्री का कैबिनेट स्तरीय पद संभालने से भी मंडल के लोगों की आवाज सीधे सरकार तक पहुंचती रही। उन्होंने तीन साल चार महीने तक भाजपा प्रदेश की कमान संभाली। दिसंबर 2025 में पंकज चाैधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावनाएं तेज हो गई थीं। रविवार को योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो उन्हें फिर मंत्री बना दिया गया।
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2024 लोकसभा चुनाव में मंडल की दो सीटें जीतने में सफल रही भाजपा
मुरादाबाद। भूपेंद्र चाैधरी के प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल के दाैरान 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में प्रदेश में पार्टी की सीटें घटी थीं लेकिन मुरादाबाद मंडल में भाजपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी। अमरोहा और बिजनौर में भाजपा विजयी रही थी।
इससे पूर्व 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का मंडल में खाता नहीं खुला था। पार्टी मंडल की सभी छह सीटें हार गई थीं।