ट्रांसपोर्ट नगर में स्थित प्राधिकरण के स्वामित्व वाली बस टर्मिनल की 1540 वर्ग मीटर जमीन आखिरकार एमडीए से छिन ही गई। एक किसान की दो बेटियों को आगे करके जमीन के खिलाड़ियों ने यहां बाउंड्री खड़ी कर ली गई है। पर्दे के पीछे सपा के एक विधायक का नाम उछल रहा है।
खास बात यह है कि प्राधिकरण की इंच भर जमीन पर कब्जा नहीं होने देने का दंभ भरने वाले एमडीए अफसर अब खामोश है। शुरू में शोर मचाने वाले एमडीए अफसरों की ये चुप्पी उन्हें कठघरे में खड़ा कर रही है।
एमडीए ने अपनी ट्रांसपोर्ट नगर योजना में बस टर्मिनल के 1540 वर्ग मीटर जमीन (गाटा संख्या- 674 ) रिजर्व की थी। प्राधिकरण के रिकार्ड पर गौर करें तो एमडीए ने इस जमीन का अधिग्रहण असगर अली नाम के किसान से किया था। जिसकी एवज में उसे मुआवजा भी दिया गया था।
प्राधिकरण ने यहां सड़क, बिजली - वाटर लाइन भी बिछवा दी। लेकिन असगर अली की मौत के बाद उसकी वारिस बनी दो बेटियों को आगे करके जमीन के कुछ खिलाड़ियों ने इस जमीन पर नजरें गढ़ा दीं।
पूरा खेल एमडीए अफसरों की शह पर खेला गया। मामला कोर्ट में गया और एमडीए अफसरों की मिलीभगत से प्राधिकरण लोअर कोर्ट से लेकर स्पेशल कोर्ट तक मुकदमों को हारता चला गया। अगस्त में जब इस जमीन पर कब्जे की कोशिश हुई तो एमडीए अफसराें ने खूब शोर मचाया।
प्राधिकरण अफसरों ने दावा किया कि बस टर्मिनल की जमीन एमडीए की है और एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं होने देंगे। यहां तक कि दो आला अफसरों में तकरार तक की नौबत आ गई। उस वक्त जमीन पर निर्माण रोक दिया गया था। लेकिन जैसे ही मामला ठंडा हुआ जमीन पर बाउंड्री खड़ी कर दी गई है।
खास बात यह है कि शुरू में चिल्लाने वाले एमडीए अफसर इस बाउंड्री पर खामोश रहे। दूसरे पक्ष ने पहले ही आरोप लगाए थे कि प्राधिकरण के इंजीनियर जमीन पर कब्जा करने देने की एवज में उनसे डिमांड कर रहे हैं। अब बाउंड्री होने से एमडीए अफसरों पर उंगलियां उठना लाजिमी है।