मुरादाबाद। रामगंगा विहार के किला तिराहे पर प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अहमद जान थिरकवा के साथ ही महान संगीतज्ञ आचार्य बृहस्पति की प्रतिमा भी लगाई जाएगी। आचार्य बृहस्पति की प्रतिमा बनकर तैयार हो चुकी है। दोनों प्रतिमाएं आमने-सामने होंगी और इस तिराहे का नाम संगीत चौक रखा जाएगा।
तबला वादक अहमद जान थिरकवा की प्रतिमा लगने के विरोध के करीब दो माह बाद नगर निगम ने यह घोषणा की है। थिरकवा की प्रतिमा का विरोध करने पर कई लोगों पर मुकदमा भी दर्ज हुआ था। विरोध के बाद नगर निगम ने उस्ताद की प्रतिमा को पन्नी से ढक दिया। अब निगम ने थिरकवा के साथ ही आचार्य बृहस्पति की प्रतिमा लगाने का भी निर्णय लिया है।
लोगों की मांग है कि इस स्थान का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस चौक रखा जाए, जबकि निगम के अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत से ही दोनों संगीतज्ञों की प्रतिमा लगाने की योजना थी लेकिन आचार्य बृहस्पति की प्रतिमा तैयार नहीं हो पाई। पहले उस्ताद थिरकवा की प्रतिमा लगने से लोग नगर निगम का उद्देश्य नहीं समझ पाए और विवाद हो गया। अब आचार्य की प्रतिमा तैयार हो गई है। जल्द ही इसे स्थापित किया जाएगा।
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संगीतज्ञों के बारे में जानें
उस्ताद अहमद जान थिरकवा
1892 में मुरादाबाद में संगीतज्ञों के परिवार में जन्मे अहमद जान खां के नाना बाबा कलंदर बख्श, उनके भाई इलाही बख्श, करीम बख्श सभी मुरादाबाद के प्रसिद्ध तबला वादकों में शामिल थे। थिरकवा के चाचा शेर खां, मामा फैयाज खां, बसवा खां और फजली खां भी तबला वादन केे क्षेत्र में प्रसिद्ध थे। यह कला उन्हें विरासत में मिली। तबले पर थिरकती अंगुलियों के कारण ही उन्हें थिरकवा उपनाम मिला। 1953-54 में थिरकवा को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। 1970 में पद्मभूषण से नवाजा गया।
आचार्य बृहस्पति
आचार्य बृहस्पति एक प्रसिद्ध संगीतज्ञ और धर्माचार्य थे। उनका जन्म रामपुर में हुआ था। वह एक राजपंडित परिवार से थे। उन्होंने संगीत और धर्म दोनों में ही ख्याति हासिल की। उन्होंने नाट्य शास्त्र के 28वें अध्याय पर ''''सज्जीवनम्'''' नामक संस्कृत और ''''साधना'''' नामक हिंदी टीका की रचना की। अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडल ने उन्हें संगीत महोपाध्याय की उपाधि दी थी। द्वारकापीठ के शंकराचार्य ने उन्हें विद्यामार्तंड की उपाधि दी थी। राष्ट्रपति ने उन्हें संगीत नाटक अकादमी का रत्नसदस्य बनाया था। वह कानपुर के विक्रमजीत सिंह सनातनधर्म कॉलेज में धर्माचार्य और हिंदी साहित्य के प्राध्यापक भी रहे।
उस्ताद अहमद जान थिरकवा की प्रतिमा का स्थान परिवर्तन करने के लिए जनता के सुझाव मिल रहे हैं। हालांकि, अभी इस पर निर्णय नहीं हो पाया है। फिलहाल संगीत चौक पर उस्ताद अहमद जान थिरकवा के साथ महान संगीतज्ञ आचार्य बृहस्पति की प्रतिमा लगाने की तैयारी है।
- आंजनेय कुमार सिंह, कमिश्नर