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Moradabad News: एक ऐसा जीआईसी, जिसमें सिर्फ 51 विद्यार्थी

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बिलारी (मुरादाबाद)। गांव थांवला स्थित राजकीय इंटर कॉलेज जहां शिक्षकों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, वहीं परिसर में विद्यार्थियों की संख्या भी संतोषजनक नहीं है। स्थापना के पांचवें वर्ष में पहुंच चुके इस जीआईसी में सिर्फ 51 विद्यार्थी हैं।
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केंद्र सरकार की एमएसडीपी योजना के तहत 2014 में थांवला गांव में राजकीय इंटर कॉलेज खोले जाने की मंजूरी मिली थी। भवन निर्माण होने के बाद 2018 में कॉलेज का संचालन शुरू हो गया, जिसमें कक्षा छह से 12वीं तक की कक्षाएं चलनी थीं। कॉलेज शुरू हुए पांच वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां सिर्फ कक्षा नौ और 10 ही संचालित हो रही हैं। कक्षा नौ में 26 और 10वीं में 25 छात्र पंजीकृत हैं। जबकि कक्षा छह, सात, आठ, 11 और 12 में किसी छात्र का दाखिला ही नहीं है।
प्रवक्ता के नौ पद स्वीकृत, एक की भी तैनाती नहीं
शासन के मानक के अनुसार कॉलेज में प्रवक्ता के नौ पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक की भी तैनाती नहीं है। वहीं सहायक अध्यापक के सात पद के सापेक्ष केवल तीन ही शिक्षक तैनात हैं। इनमें से एक फखरुल इस्लाम ही करीब डेढ़ साल से कार्यवाहक प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी निभा भी रहे हैं। चपरासी के चार पदों पर भी कोई तैनात नहीं है। साथ ही न तो कोई सफाईकर्मी है और न ही सुरक्षा गार्ड कॉलेज में नियुक्त है।
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लैब में नहीं है कोई उपकरण
कॉलेज में विज्ञान की लैब के चार कक्ष हैं, जो लंबे समय से बंद हैं। लैब की टेबल व फर्श धूल से अटे है। प्रयोग करने के लिए कोई उपकरण नहीं है। चारों ओर गंदगी फैली है। लैब होने पर भी विद्यार्थी प्रैक्टिकल नहीं कर पाते।
- स्टाफ की कमी की जानकारी विभागीय अधिकारी को दी गई है। मानक के अनुसार स्टाफ की तैनाती के लिए अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। स्टाफ की कमी से कॉलेज में केवल दो कक्षाओं का ही संचालन हो रहा है, जबकि पांच कक्षाएं चल ही नहीं पा रही हैं। - फखरुल इस्लाम, कार्यवाहक प्रधानाचार्य
- कॉलेज में स्टाफ की तैनाती और अन्य व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के लिए क्षेत्रीय सांसद, विधायक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा है। स्टाफ की कमी से कॉलेज में कक्षा 11 व 12 की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति में इन कक्षाओं में पढ़ाई करने वाली थांवला व आसपास की छात्राओं को बिलारी जाना पड़ रहा है।

- सायरा बेगम, ग्राम प्रधान

- कॉलेज में व्यवस्थाएं ठीक न होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कॉलेज में न तो विज्ञान लैब संचालित है और न ही पुस्तकालय। इससे विद्यार्थियों को परेशानी होती है। - समरीन, छात्रा
- कॉलेज में पीने के पानी के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। विद्यार्थियों के खेलने के लिए मैदान भी नहीं है। परिसर में साफ-सफाई न होने से गंदगी फैली रहती है। - इल्मा, छात्रा
- शिक्षकों की कमी और कॉलेज में अव्यवस्थाएं फैली होने के कारण गांव व आसपास के विद्यार्थी बिलारी पढ़ने जाते हैं। व्यवस्थाएं बेहतर हों तो बच्चों को बाहर पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा। - नवनीत, छात्र
- कॉलेज में संसाधनों की कमी के चलते ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को शहर पढ़ने भेजते हैं। व्यवस्थाएं सुधरें तो कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है। - बजुबैर, छात्र
- कक्षाओं का संचालन न होने पर विधायक ने विधानसभा में भी सवाल पूछा था। तब भी लिखकर भेजा था कि शिक्षक न होने की वजह से कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। शिक्षकों की कमी है। नई नियुक्ति नहीं हुई है। नए सत्र में किसी अन्य कॉलेज से शिक्षकों का समायोजन कर 11 और 12वीं की कक्षाएं संचालित करवाई जाएंगी। - मनोज कुमार द्विवेदी, संयुक्त निदेशक, द्वादश मंडल मुरादाबाद
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