मुरादाबाद। बुखार मापने के लिए 60 रुपये का थर्मामीटर 300 रुपये में मिल रहा है। शुगर जांचने वाले ग्लूकोमीटर की कीमत 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक बताई जा रही है, जबकि 180 रुपये के ऑक्सीमीटर का प्रिंट रेट 500 रुपये तक है। घरों में बीमारी की निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाले इन वाइटल उपकरणों की वास्तविक कीमत और पैक पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में बड़ा अंतर सामने आया है। ब्लड प्रेशर मशीन से लेकर थर्मामीटर तक की कीमतों में दो से पांच गुना तक का अंतर है। ऐसे में सवाल है कि इन उपकरणों की एमआरपी किस आधार पर तय होती है और ग्राहकों को इनकी वास्तविक कीमत की जानकारी क्यों नहीं मिलती।
ब्लड प्रेशर जांचने वाली एक मशीन की बाजार में कीमत 500 रुपये बताई जा रही है, जबकि उसकी एमआरपी 2550 रुपये तक है। यही मशीन ऑनलाइन बाजार में 650 रुपये और शहर के थोक दवा बाजार में 1100 रुपये में मिल रही है। इसी तरह शुगर जांचने वाली 600 रुपये की मशीन 2000 रुपये में बेची जा रही है। इन कीमतों में अंतर के बीच ग्राहकों के लिए यह समझना मुश्किल है कि उपकरण की वास्तविक कीमत कितनी है और एमआरपी के मुकाबले उन्हें कितनी छूट मिल रही है। ऑनलाइन बिक्री के उपलब्ध रिकॉर्ड में भी कीमतों का बड़ा अंतर दिखाई देता है। एक्यूट्रस्ट ब्रांड की डिजिटल बीपी मशीन की एमआरपी 999 रुपये और बिक्री कीमत 527 रुपये दर्ज है। दोनों के बीच 472 रुपये का अंतर है। क्योरचेक ब्रांड की रिचार्जेबल बीपी मशीन की एमआरपी 2550 रुपये है, जबकि यह 661 रुपये में उपलब्ध है। इसमें 1889 रुपये का अंतर है। वहीं, टाटा 1एमजी की बीपी मशीन की एमआरपी 1355 रुपये और बिक्री कीमत 1101 रुपये दर्ज है। इसमें 254 रुपये का अंतर है।
पांच उपकरणों के व्यापार मार्जिन पर सरकार की नजर
चिकित्सकीय उपकरणों की कीमतों में व्यापार मार्जिन को लेकर केंद्र सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने ब्लड प्रेशर मशीन, डिजिटल थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर, पल्स ऑक्सीमीटर और नेबुलाइजर को व्यापार मार्जिन नियंत्रण की व्यवस्था में शामिल किया था। जुलाई 2021 की अधिसूचना में इन उपकरणों के लिए वितरक को बिक्री मूल्य पर अधिकतम 70 प्रतिशत व्यापार मार्जिन की सीमा के आधार पर एमआरपी तय करने का प्रावधान किया गया था। एनपीपीए के मुताबिक, गैर-अनुसूचित दवाओं और चिकित्सकीय उपकरणों की एमआरपी में पिछले 12 महीनों की एमआरपी के मुकाबले 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी नहीं की जा सकती। नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई का भी प्रावधान है।
जांच में अधिक अंतर मिलने पर कंपनियों को नोटिस
औषधि निरीक्षक उमेश भारती के मुताबिक, विभाग की ओर से लगातार मेडिकल स्टोर और अस्पतालों की जांच की जाती है। दवाओं और उपकरणों की एमआरपी में बहुत अधिक अंतर मिलने पर कंपनियों को नोटिस भेजे जाते हैं। अधिकांश दवाओं के रेट एनपीपीए द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और उसी के मुताबिक कार्रवाई की जाती है।
वर्जन
दुकानदार बहुत अधिक मार्जिन पर इन उपकरणों को नहीं बेचते हैं। ग्राहकों को पक्का बिल भी दिया जाता है। रेट तय करना एनपीपीए के अधीन है। ऐसे सभी उत्पादों को एनपीपीए के दायरे में लेना चाहिए, जिनकी एमआरपी में कई गुना तक अंतर है।
- साहित्य रस्तोगी, अध्यक्ष, ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन
लोगों के कोट्स
मुझे नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करनी पड़ती है। मशीन खरीदने के लिए बाजार गया तो अलग-अलग दुकानों पर कीमतों में अंतर मिला। कहीं 1100 तो कहीं 1500 तक। ऑनलाइन भी एमआरपी और बिक्री कीमत में काफी फर्क दिखा। आम आदमी को यह समझना मुश्किल है कि मशीन की सही कीमत कितनी है।
- ओमपाल सिंह
घर में बुजुर्गों की शुगर और बीपी जांचने के लिए मशीन रखनी पड़ती है। पहले दवाओं का खर्च उठाते हैं, फिर जांच के उपकरण खरीदने पड़ते हैं। अगर एक ही मशीन अलग-अलग कीमतों पर मिल रही है तो दुकानदार को इसकी वजह बतानी चाहिए, ताकि ग्राहक सोच-समझकर खरीद सके।
- दिलीप सिंह
डॉक्टर ने घर पर बीपी की निगरानी करने की सलाह दी थी। बाजार में मशीन देखने पहुंचे तो किसी की कीमत एक हजार रुपये थी और ऑनलाइन वही मशीन कम दाम पर दिखी। दुकानदार से कीमत का अंतर पूछा, लेकिन आम ग्राहक के लिए इसकी असली वजह जानना आसान नहीं है।
- छत्रपाल
शुगर की जांच के लिए ग्लूकोमीटर और उसकी स्ट्रिप लगातार खरीदनी पड़ती हैं। मशीन की कीमत के साथ स्ट्रिप का खर्च भी देखना पड़ता है। दुकानों पर अलग-अलग दाम मिलने से बजट बिगड़ता है। इन उपकरणों की कीमत और उनकी गुणवत्ता के बारे में ग्राहकों को साफ जानकारी मिलनी चाहिए।
- नरगिस