मुरादाबाद। सूबे की जेलों की हालत खस्ता है। मुरादाबाद की जेल में तो हालात बदतर हैं। जिस जेल को महज छह सौ बंदियों के लिए बनाया गया था उसमें ढाई हजार से ज्यादा बंदी हैं। बैरकों में बंदियों को ठूस - ठूस कर भरा गया है। कैदियों से लबालब इन बैरकों में बंदियों का सांस लेना तक मुश्किल है। नतीजतन जेल बीमार हो चली है। सलाखों के पीछे बंदियों के बीमार होने की संख्या बढ़ गई है। मुरादाबाद कारागार में तो एक महिला बंदी के मानसिक रोगी हो जाने का मामला भी प्रकाश में आया है।
मुरादाबाद जेल पिछले 20 सालों से ओवरक्राउडिंग से जूझ रही है। तभी से इस जेल को दूसरी जगह शिफ्ट करने के प्रस्ताव बनने शुरू हुए। जेल की क्षमता को बढ़ाने की बात उठी। लेकिन जमीन नहीं मिली। इसके बाद जेल को मल्टीस्टोरी बनाने का प्रस्ताव चला लेकिन वह भी बीच में ही धड़ाम हो गया। नतीजतन जेल में बंदियाें की बीमारी के मामले बढ़ने लगे। टीवी से कई बंदियाें की मौत हो चुकी है। अब एक महिला बंदी रामप्यारी में मानसिक रोग के लक्षण देखे गए हैं। डाक्टरों ने उसे मानसिक चिकित्सालय बनारस रेफर करने की सिफारिश कर दी है। इस महिला की मनोदशा दर्शाती है कि जेल में बंदियों के लिए वैसी सुविधाएं नहीं रह गईं जिनका दावा किया जाता है। डीआईजी जेल आरपी सिंह मानते हैं कि उपलब्ध संसाधनों में बेहतर करने की कोशिश की जा रही है लेकिन नई जेल बनने तक बंदियों की भीड़ को झेलना मजबूरी है। उन्हाेंने कहा कि बंदियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर अतिरिक्त सावधानियां बरतने के निर्देश अधीनस्थों को दिए जाएंगे।