मुरादाबाद की धरती पर रविवार को देवभूमि उत्तराखंड की लोक परंपरा और संस्कृति जीवंत हो उठी। ‘उत्तरायणी कौथिक’ में उत्तराखंड के लोकगीतों एवं लोकनृत्य की धूम रही। लोकगीतों की धुनों पर प्रवासी उत्तराखंडी झूमने को मजबूर हो गए।
सिविल लाइन, जिगर मंच में उत्तरांचल सांस्कृतिक विकास समिति की ओर से उत्तरायणी कौथिक 2019 आयोजित हुआ। एमएलएस डा. जयपाल सिंह व्यस्त, मेयर विनोद अग्रवाल, समिति अध्यक्ष डा. अजय पंत एवं सचिन अनिल ममगाई समेत समिति पदाधिकारियों ने मां सरस्वती देवी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कौथिक की औपचारिक शुरुआत की। उत्तराखंड से आए लोक गायक सुमित्रा रावत और योगेंद्र गहोरी ने कुमाऊं के सुप्रसिद्ध लोक गायक स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के गीत.. घुघती ना बासो...., हाय तेरी रुमाला..., और हिट साई हिट कौथिक जानू द्वारहाट.. गाकर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
स्थानीय कलाकार चंद्रा, रुचि, दिप्पी और सिम्मी ने ‘हाई काकड़ी झिलमा’..., गोविंद, पूजा, अंशु, नैना, जीवन और निशा ने ‘माल देश की छोरी तनू’, और सारिका, पूजा, निशा, कल्पना और डॉली ने ‘तेरी रंग्याली पिछोड़ी’ गीत पर समा बांध दिया। उत्तराखंड से आए कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकारों के एक से बढ़कर लोकनृत्य एवं लोकगीतों की प्रस्तुति देकर जिगर मंच पर देवभूमि पर संस्कृति की छठा जीवंत कर दी। गढ़वाली गीत चैत का चैत्वाल्या पर सभी दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ झूमने लगे। इस सुप्रसिद्ध गीत की आशीष, काजल, अंकुर, आरती, कन्हैया, बेगी, सूरज, भावना, दीपा और वीरेंद्र की टीम ने सामूहिक प्रस्तुति दी। स्थानीय बाल कलाकारों ने युवाओं के दिलों पर राज करने वाले गायक स्व. पप्पू कार्की के गीतों पर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। सचिव अनिल ममगाई ने संस्था की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संस्था अध्यक्ष ने अतिथियों का स्वागत किया। उा. पीके पांडे, टिकम सिंह, एसएस नेगी, गोविंद शाही, विपिन चंद्र भट्ट राकेश बलौदी और देवेंद्र बिष्ट समेत समिति के पदाधिकारी एवं सैकड़ों लोग मौजूद रहे। अध्यक्षता डा. जगदीश प्रसाद कोठारी और संचालन धन सिंह फर्सवाण ने किया।
देश की मुकुट है उत्तराखंड: व्यस्त
मुरादाबाद। एमएलसी डा. जयपाल सिंह व्यस्त ने कहा कि उत्तराखंड देश का मुकुट है। सनातन धर्म में चारों वेदों की रचना देवभूमि में हुई है। भारतीय संस्कृति की आत्म उत्तराखंड में है। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा और सुरक्षा उत्तराखंड के रणबाकुर के हाथों में है। देश सुरक्षित है इसका श्रेय उत्तराखंड को जाता है। गंगा और यमुना का उद्गम भी देवभूमि से ही है। डा. व्यस्त ने कहा कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्तराखंड का कोई जवाब नहीं है। पश्चिमी यूपी में लोक संस्कृति की पूर्ति उत्तराखंड कर रहा है।
लोक संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत: मेयर
मुरादाबाद। मेयर विनोद अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड से मुरादाबाद का पुराना रिश्ता है। उन्होंने उत्तरायणी कौथिक में युवाओं की भीड़ देख आयोजन समिति को बधाई दी। कहा कि उत्तराखंड के युवा पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति से जुड़ी है यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। मेयर ने कहा कि मुरादाबाद में रहने वाले उत्तराखंड के लोग उनके परिवार का हिस्सा है। परिवार का मुखिया होने के नाते वो उनकी हर समस्या का प्राथमिकता से निदान करेंगे।
उत्तराखंडी जैविक उत्पादों की जमकर बिक्री
मुरादाबाद। देवभूमि उत्तराखंड देश ही नहीं दुनिया में अपनी संस्कृति, वेशभूषा, परंपरा और खानपान के लिए अलग पहचान रखता है। नौकरी और रोजगार की तलाश में देवभूमि से पलायन कर पीतल नगरी मुरादाबाद में बसे लोगों के लिए रविवार को जिगर मंच में उत्तराखंड का बाजार सज गया। उत्तराणी कौथिक में उत्तराखंड की जैविक दालों, लेकर सब्जियों के कई स्टॉल सजे। अल्मोड़ा की विश्व प्रसिद्ध बाल मिठाई से लेकर उत्तराखंड की औषधियां स्टॉलों में लगाई गई। कौथिक देखने पहुंचे लोग जैविक दाल, औषधियों और बाल मिठाई पर टूट पड़े। मानों स्टॉलों में फ्री में सामान लूट रहा हो। स्टालों में मडुवे का आटा, मडुवे और मक्के के बिस्कुट, मुस्यारी की राजमा, गहत की दाल के स्टॉल दोपहर में ही खाली हो गए। बाल मिठाई भी दोपहर बाद खत्म हो गई।
परिवार संग मेला देखने पहुंच प्रवासी
उत्तरायणी कौथिक मकर संक्रांति पर उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में लगने वाला सबसे बड़ा मेला है। मुरादाबाद में भी पिछले तीन सालों से कौथिक आयोजित हो रहा है। इसमें कलाकार से लेकर जैविक उत्पाद उत्तराखंड से आते हैं। मुरादाबाद जिले में उत्तराखंड के करीब एक लाख और मुरादाबाद शहर में 35 हजार परिवार रहते हैं। परिवारों को कौथिक का इंतजार रहता है। रविवार को सैकड़ों परिवार मेले में उमड़े। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग शामिल थे। लोकगीतों एवं लोकनृत्य का आनंद लेने के साथ प्रवासियों ने जमकर उत्पादों की खरीद की।