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Moradabad News: निर्यातकों के लिए सेंटा का गिफ्ट बनी 90 दिनों की रियायत

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मुराादाबाद। ट्रंप प्रशासन की ओर से टैरिफ में मिली 90 दिन की राहत मुरादाबाद के निर्यातकों के लिए सेंटा के गिफ्ट जैसी है। घोषणा के बाद से ही फंसे हुए 1500 करोड़ रुपये के ऑर्डर कंफर्म होने लगे हैं। साथ ही क्रिसमस के लिए नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद जाग उठी है। निर्यातक 16 से 19 अप्रैल तक दिल्ली में होने वाले फेयर से भी बड़ी आस लगाए बैठे हैं। टैरिफ से 90 दिनों की रियायत से 3500 करोड़ के निर्यात को संजीवनी मिल गई है।
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हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) से जुड़े पदाधिकारियों के मुताबिक क्रिसमस के ऑर्डर मार्च व अप्रैल में मिलते हैं। 90 दिन में माल तैयार कर जहाजों के जरिये भेजना होता है। अब निर्यातकों के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि 90 दिन के बजाय 60 से 70 दिन के भीतर माल तैयार कर बंदरगाहों से जहाजों पर लदान करा दें।
मुरादाबाद के 10 हजार करोड़ के निर्यात का 70 फीसदी व्यापार अमेरिका के साथ है। ऐसे में मुरादाबाद की दो हजार हस्तशिल्प इकाइयों व इनसे जुड़े करीब पांच लाख लोगों के लिए 90 दिन की रियायत अहम है। हालांकि, निर्यातकों का मानना है कि जल्द ही इस पर निर्णय होना चाहिए। हस्तशिल्प उत्पादों को शून्य शुल्क के दायरे में रखा जाना चाहिए। इसके लिए मुरादाबाद के निर्यातक और ईपीसीएच के उपाध्यक्ष नीरज खन्ना हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मिले थे।
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ईपीसीएच के आंकड़ों के मुताबिक 16 से 19 अप्रैल तक होने वाले फेयर में अमेरिका, यूरोप से अच्छी संख्या में विदेशी ग्राहकों के आने की उम्मीद है। फिलहाल मुरादाबाद के निर्यातकों के पास क्रिसमस को लेकर जो ऑर्डर आए हैं, उनमें घरेलू साज सज्जा व गिफ्ट आइटम हैं। यह ऑर्डर फैक्टरियों में तैयार होने लगे हैं।


छोटे निर्यातकों के लिए जल्दी माल तैयार करना चुनौती
90 दिन की रियायत में बड़े निर्यातक तो 60-65 दिन के भीतर माल तैयार कर जहाजों में लदान करा देंगे, लेकिन चुनौती छोटे निर्यातकों के लिए होगी। मुरादाबाद में 500 से अधिक ऐसी निर्यात इकाइयां हैं, जिनके पास बहुत अधिक संसाधन नहीं हैं। ऐसे में जल्दी माल तैयार करने में उन्हें परेशानी होगी। ग्राहकों की ओर से दबाव आने लगा है कि 60 दिन में माल तैयार कर लदान कराया जाए। दूसरी चिंता यह भी है कि दिल्ली फेयर में आने वाले ग्राहकों से पहले की अपेक्षा कम ऑर्डर मिल सकते हैं।
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टैरिफ के कारण फंस गए थे 1500 करोड़ के ऑर्डर
ट्रंप प्रशासन की ओर से टैरिफ की घोषणा के बाद मुरादाबाद के निर्यातकों के 1500 करोड़ के ऑर्डर फंस गए थे। नए ऑर्डर नहीं मिल रहे थे और पुराने होल्ड होने लगे थे। वहीं जो माल बंदरगाहों तक पहुंच गया है या पहुंचने वाला है, उसे लेकर भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई। उनमें पारंपरिक निर्यात आइटम के अलावा ईस्टर के लिए तैयार किए गए उत्पाद थे। पांच अप्रैल तक जहाजों में लादे गए माल पर टैरिफ न लगने की घोषणा से थोड़ी राहत मिली थी, अब 90 दिनों की छूट से नए कारोबार की मुश्किलें भी कम हुई हैं।

निर्यातकों ने ली राहत की सांस

टैरिफ में 90 दिन की रियायत से मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा। जून के अंत तक हम क्रिसमस के ऑर्डर तैयार कर अमेरिका भेज देंगे। हालांकि, इसके लिए काम की गति बढ़ानी होगी और ज्यादा मेहनत करनी होगी। - जेपी सिंह, चेयरमैन यस

नई घोषणा से निर्यातकों ने राहत की सांस ली है। यह तीन महीने कारोबार का समय है। इन दिनों रुका हुआ माल निकलेगा और नए ऑर्डर कंफर्म होंगे। दिल्ली फेयर से अच्छी संख्या में ऑर्डर मिलने की उम्मीद जगी है। - नवेदुर्रहमान, अध्यक्ष, एमएचईए

हस्तशिल्प उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह हटना चाहिए। शुल्कों में बढ़ोतरी के कारण अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारी छूट की मांग कर रहे हैं, जिससे निर्यातक वित्तीय दबाव में हैं। 90 दिनों की छूट को मैं आंशिक राहत कहूंगा, लेकिन यह भी बहुत अहम साबित होगी। - नीरज खन्ना, उपाध्यक्ष, ईपीसीएच

मुरादाबाद का 70 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है। टैरिफ में 90 दिनों की छूट से राहत मिली है, लेकिन इसके बाद फिर संकट खड़ा होगा और असमंजस की स्थिति होगी। फिलहाल हम सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। - गोपाल मेहता, क्षेत्रीय सचिव, आईआईए
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